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What about modern Hindi? Storytel in partnership with India Habitat Centre - Excerpts from a wonderful panel discussion on the future of modern Hindi #literary #paneldiscussion #hindilover #hindiliterature #hindiaudiobooks #language #literature #storytelindia
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वो जब देखो तब देखता ही रहता है।
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ना जाने कहाँ से हर शाम हमारी आँखों के सामने आ जाता है। साँवला रंग, काली आँखें, बिल्कुल टपोरी लगता है। उसका नाम नहीं जानते। पर जब भी मिलता है बस घूरता रहता है। जैसे हमारी आँखों से साले को एनर्जी मिलती हो। मन करता है कि आँखें नोच लें उसकी। कुछ शर्म-वर्म है या नहीं उसमें? या भरे बाज़ार में कोई इज़्ज़त नहीं उसकी?
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हम उसे नहीं जानते। उसे शायद हमारी कोचिंग के बारे में नहीं पता, वर्ना उसका बस चले तो वहीं से हमारे पीछे लग जाए। बस वो एक गली है जहाँ वो हर दिन खड़ा मिलता है और फिर वो आ जाता है हमारे पीछे। उसे क्या ज़रा भी अंदाज़ा नहीं कि कितना डर लगता है हमें? चाहे वो हमसे दूरी पर चले, पर हमारी घबराहट तो हमारे क़रीब चलती है ना!
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घर में आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं। इसलिए पैदल जाना पड़ता है घर तक। सोचते हैं कि तसल्ली से पढ़ाई करेंगे तो घर पर कुछ मदद होगी। पर ये एक नई आफ़त हमें जीने कहाँ दे रही है। पहले हमें लगता था कि ये बस हमारा वहम है। यही चेक करने के लिए कभी हम तेज़ चलते, कभी धीरे और कभी किसी दुकान पर घंटों बिता देते। पर वो हरामी तब भी वहीं खड़ा होता। उसे क्या लगता है कि किसी लड़की का पीछा करने से वो इम्प्रेस होती है? कोई जाके बताओ उसे कि डर के मारे जीना मुश्किल हो जाता है।
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वो क्या चाहता है? हम चलते-चलते रुकें, पलटें, और उसे देख कर मुस्कुराएँ? और फिर वो हमारे पीछे चलने के बजाए साथ चलने लगे? वो चाहे जितनी कोशिशें कर ले, हम ये पल कभी नहीं आने देंगे। अरे यार, ये फिर दिख गया। अब ये फिर हमारा पीछा करेगा। पर ये क्या, आज ये पीछे नहीं आ रहा। क्या इसकी अक़्ल ठिकाने आ गई? या इसने हार मान ली? जो भी हो, कम से कम आज तो हम तसल्ली से अपने घर जा पाएँगे। ना जाने कितने दिनों बाद सुक़ून से घर जा रहे।
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काश! उसकी कोई बहन होती जो उसे ये बात समझती कि जिसको वो अपना प्यार समझता है, जो उसे सिर्फ़ पीछा करने या इम्प्रेस करने जैसी मामूली चीज़ें लगती हैं, वो एक लड़की के लिए एक बुरे सपने से कम नहीं होता, कि कैसे उसके दिन का ये हिस्सा उसको नर्क से बत्तर लगता है। आपको क्या लगता है, उसकी बहन ने उसे समझाया होगा? या नहीं?
*** वो जब देखो तब देखता ही रहता है। . ना जाने कहाँ से हर शाम हमारी आँखों के सामने आ जाता है। साँवला रंग, काली आँखें, बिल्कुल टपोरी लगता है। उसका नाम नहीं जानते। पर जब भी मिलता है बस घूरता रहता है। जैसे हमारी आँखों से साले को एनर्जी मिलती हो। मन करता है कि आँखें नोच लें उसकी। कुछ शर्म-वर्म है या नहीं उसमें? या भरे बाज़ार में कोई इज़्ज़त नहीं उसकी? . हम उसे नहीं जानते। उसे शायद हमारी कोचिंग के बारे में नहीं पता, वर्ना उसका बस चले तो वहीं से हमारे पीछे लग जाए। बस वो एक गली है जहाँ वो हर दिन खड़ा मिलता है और फिर वो आ जाता है हमारे पीछे। उसे क्या ज़रा भी अंदाज़ा नहीं कि कितना डर लगता है हमें? चाहे वो हमसे दूरी पर चले, पर हमारी घबराहट तो हमारे क़रीब चलती है ना! . घर में आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं। इसलिए पैदल जाना पड़ता है घर तक। सोचते हैं कि तसल्ली से पढ़ाई करेंगे तो घर पर कुछ मदद होगी। पर ये एक नई आफ़त हमें जीने कहाँ दे रही है। पहले हमें लगता था कि ये बस हमारा वहम है। यही चेक करने के लिए कभी हम तेज़ चलते, कभी धीरे और कभी किसी दुकान पर घंटों बिता देते। पर वो हरामी तब भी वहीं खड़ा होता। उसे क्या लगता है कि किसी लड़की का पीछा करने से वो इम्प्रेस होती है? कोई जाके बताओ उसे कि डर के मारे जीना मुश्किल हो जाता है। . वो क्या चाहता है? हम चलते-चलते रुकें, पलटें, और उसे देख कर मुस्कुराएँ? और फिर वो हमारे पीछे चलने के बजाए साथ चलने लगे? वो चाहे जितनी कोशिशें कर ले, हम ये पल कभी नहीं आने देंगे। अरे यार, ये फिर दिख गया। अब ये फिर हमारा पीछा करेगा। पर ये क्या, आज ये पीछे नहीं आ रहा। क्या इसकी अक़्ल ठिकाने आ गई? या इसने हार मान ली? जो भी हो, कम से कम आज तो हम तसल्ली से अपने घर जा पाएँगे। ना जाने कितने दिनों बाद सुक़ून से घर जा रहे। . काश! उसकी कोई बहन होती जो उसे ये बात समझती कि जिसको वो अपना प्यार समझता है, जो उसे सिर्फ़ पीछा करने या इम्प्रेस करने जैसी मामूली चीज़ें लगती हैं, वो एक लड़की के लिए एक बुरे सपने से कम नहीं होता, कि कैसे उसके दिन का ये हिस्सा उसको नर्क से बत्तर लगता है। आपको क्या लगता है, उसकी बहन ने उसे समझाया होगा? या नहीं?
दास्ताँ-ए-स्टॉकिंग | ऋतिक साहू
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हमें उनको देखना बहुत पसंद है।
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हमने जब से शाम को अपने बिस्तर का दामन छोड़ असल ज़िंदगी की ओर क़दम बढ़ाया है, वो ना जाने कहाँ से हमारी आँखों के सामने आ जाती हैं। गोरा रंग, भूरी आँखें, दुबली-पतली-सी हैं वो। उनका नाम नहीं जानते। आँखों में कुछ अलग ही गहराई-सी है। जब-जब उनको देखते हैं, उनकी आँखों में गिरते चले जाते हैं। इस हद तक कि कभी-कभी होश ही नहीं रहता कि भरे बाज़ार में इतना गहरा गिरना ठीक नहीं। भई हमारी भी कोई रेपुटेशन है कि नहीं?
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वो शायद हमें नहीं जानती। या शायद जानती हैं। हमें नहीं पता। हम नहीं जानते कि हर शाम वो कहाँ से आती हैं। हमने तो बस उनके रास्तों को हमारे रास्ते काटते देखा है। और इसे हम एक इशारा समझते हैं। अब आप ही बताओ, इतने लोग गुज़रते है उस गली से, फिर भला उन्हीं पर क्यों हमारा ध्यान जा कर रुका? ये तो एक इशारा ही हुआ ना! हम से जितना बनता है हम उतना उनके साथ रहने की कोशिश करते हैं। चाहे वो हम से दूरी पर ही चलें पर उनका वही दूर वाला साथ भी हमें बहुत अच्छा लगता है।
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शिवम जनरल स्टोर के दाहिने हाथ वाली गली में चौथा घर है उनका। घर है या किराए पर रहती हैं, हम नहीं जानते। ना जाने कहाँ से इतनी दूर पैदल जाने की हिम्मत रखती हैं। हम तो डेली चल-चलकर थक जाते हैं। बीच में राधे पान शॉप पर जब तक एक पान मुँह में घोल नहीं लेते तब तक एनर्जी ही नहीं आती। वैसे उनको कभी ख़ुद के मकान से जाते नहीं देखा, क्या पता किस समय बाहर निकलती हैं। पर हाँ, उनको घर लौटते हमेशा ही देखा है; उनको घर तक जाते देखा है। मैडम भी ग़ज़ब हैं, कभी धीरे चलती हैं, कभी बहुत तेज़, और कभी तो किसी भी दुकान में घुस जाती हैं और घन्टों बिता देती हैं। पर हम भी कोई बेवकूफ़ नहीं जो इतनी-सी परीक्षा से घबरा जाएँ। हमारी कंसिस्टेंसी पर उन्हें प्यार कब तक नहीं आएगा? और ना आए तो ना सही, हमें बस उन्हें देखना ही बहुत पसंद है।
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बहुत उम्मीद लगी हुई है कि कभी तो वो उसी रास्ते पर रुकेंगी, पलटेंगी, हमें देख कर मुस्कुराएँगी और फिर चलने लगेंगी। तब कहीं जाकर हम उनके पीछे चलने के बजाए उसके साथ चल पाएँगे। पर जब तक ये पल नहीं आता तब तक तो कोशिशें जारी रखनी ही हैं। अरे देखो, वो गुज़री वह हमारी आँखों के सामने से। आज तो नीली कुर्ती में क्या कमाल लग रही हैं मैडम।
दास्ताँ-ए-स्टॉकिंग | ऋतिक साहू . हमें उनको देखना बहुत पसंद है। . हमने जब से शाम को अपने बिस्तर का दामन छोड़ असल ज़िंदगी की ओर क़दम बढ़ाया है, वो ना जाने कहाँ से हमारी आँखों के सामने आ जाती हैं। गोरा रंग, भूरी आँखें, दुबली-पतली-सी हैं वो। उनका नाम नहीं जानते। आँखों में कुछ अलग ही गहराई-सी है। जब-जब उनको देखते हैं, उनकी आँखों में गिरते चले जाते हैं। इस हद तक कि कभी-कभी होश ही नहीं रहता कि भरे बाज़ार में इतना गहरा गिरना ठीक नहीं। भई हमारी भी कोई रेपुटेशन है कि नहीं? . वो शायद हमें नहीं जानती। या शायद जानती हैं। हमें नहीं पता। हम नहीं जानते कि हर शाम वो कहाँ से आती हैं। हमने तो बस उनके रास्तों को हमारे रास्ते काटते देखा है। और इसे हम एक इशारा समझते हैं। अब आप ही बताओ, इतने लोग गुज़रते है उस गली से, फिर भला उन्हीं पर क्यों हमारा ध्यान जा कर रुका? ये तो एक इशारा ही हुआ ना! हम से जितना बनता है हम उतना उनके साथ रहने की कोशिश करते हैं। चाहे वो हम से दूरी पर ही चलें पर उनका वही दूर वाला साथ भी हमें बहुत अच्छा लगता है। . शिवम जनरल स्टोर के दाहिने हाथ वाली गली में चौथा घर है उनका। घर है या किराए पर रहती हैं, हम नहीं जानते। ना जाने कहाँ से इतनी दूर पैदल जाने की हिम्मत रखती हैं। हम तो डेली चल-चलकर थक जाते हैं। बीच में राधे पान शॉप पर जब तक एक पान मुँह में घोल नहीं लेते तब तक एनर्जी ही नहीं आती। वैसे उनको कभी ख़ुद के मकान से जाते नहीं देखा, क्या पता किस समय बाहर निकलती हैं। पर हाँ, उनको घर लौटते हमेशा ही देखा है; उनको घर तक जाते देखा है। मैडम भी ग़ज़ब हैं, कभी धीरे चलती हैं, कभी बहुत तेज़, और कभी तो किसी भी दुकान में घुस जाती हैं और घन्टों बिता देती हैं। पर हम भी कोई बेवकूफ़ नहीं जो इतनी-सी परीक्षा से घबरा जाएँ। हमारी कंसिस्टेंसी पर उन्हें प्यार कब तक नहीं आएगा? और ना आए तो ना सही, हमें बस उन्हें देखना ही बहुत पसंद है। . बहुत उम्मीद लगी हुई है कि कभी तो वो उसी रास्ते पर रुकेंगी, पलटेंगी, हमें देख कर मुस्कुराएँगी और फिर चलने लगेंगी। तब कहीं जाकर हम उनके पीछे चलने के बजाए उसके साथ चल पाएँगे। पर जब तक ये पल नहीं आता तब तक तो कोशिशें जारी रखनी ही हैं। अरे देखो, वो गुज़री वह हमारी आँखों के सामने से। आज तो नीली कुर्ती में क्या कमाल लग रही हैं मैडम।
Shades of Red
Day 6 : Prakrati (Creative force) and Sumitra Nandan Pant
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Today's post is about the most important aspect, in fact the very essence, of feminine energy - Prakrati. Prakrati in it's broad sense means the creative force that puts consciousness into action and creates the universe. In it's narrow sense it means nature. The only poet who comes to my mind when I think of nature's beauty is Sumitra Nandan Pant. He was called प्रकृति का सुकुमार कवि । Prakrati ka Sukumar Kavi(roughly translates to nature's gentle poet). He wrote vividly about seasons, flowers, birds and clouds. His poem सोनजुही | Sonjuhi about the Juhi flower creeper is one of my favourites. In this poem, he has personified the creeper. He imagines it as a beautiful young girl.
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सोनजुही की बेल हठीली 
लटकी सधी अधर पर!
झालरदार गरारा पहने 
स्वर्णिम कलियों के सज गहने 
बूटे कढ़ी चुनरी फहरा 
शोभा की लहरी-सी लहरा 
तारों की-सी छाँह सांवली,
सीधे पग धरती न बावली 
कोमलता के भार से मरी 
अंग भंगिमा भरी, छरहरी!
उदि्भद जग की-सी निर्झरिणी
हरित नीर, बहती सी टहनी!
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Sonjuhi ki bel hathili
lataki sadhi adhar par!
jhaalardaar gharaara pahne
svarnim kaliyon ke saj gahane
boote kadhi chunari phaara
shobha ki lahari-si lahara
taaron ki-si chhaanh saanvli
seedhe pag dharati na baavali
komalta ke bhaar se mari
ang bhangima bhari, chharahari!
udibhad jag ki-si nirjharinee
harit neer, bahati si tehnee! .
Pant ji was a Chhayavadi poet and his poems were bejewelled with metaphors and similies. I find it astonishing how he used one element of nature as the metaphor for another, like in this excerpt he compares a 'cheerful fragment of sunshine' with a bird's chick. .
एक धूप का हँसमुख टुकड़ा
तरु के हरे झरोखे से झर 
अलसाया है धरा धूल पर 
चिड़िया के सफ़ेद बच्चे सा!
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ek dhoop ka hansmukh tukda
taru ke hare jharokhe se jhar
alasaaya hai dhara dhool par
chidiya ke safed bachche sa
.
Today's outfit is a Gamosa style Mekhela Sador from @ilika_p.  The white in this combination signfies masculine conciousness, Purush and the red signifies Prakrati, the feminine creative force. .
I've draped a Mekhela Sador for the first time so please excuse the evident 'Nausikhiyapan'. .
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#desidrapes_shadesofred #desidrapesnavratrispecial
Shades of Red Day 6 : Prakrati (Creative force) and Sumitra Nandan Pant . Today's post is about the most important aspect, in fact the very essence, of feminine energy - Prakrati. Prakrati in it's broad sense means the creative force that puts consciousness into action and creates the universe. In it's narrow sense it means nature. The only poet who comes to my mind when I think of nature's beauty is Sumitra Nandan Pant. He was called प्रकृति का सुकुमार कवि । Prakrati ka Sukumar Kavi(roughly translates to nature's gentle poet). He wrote vividly about seasons, flowers, birds and clouds. His poem सोनजुही | Sonjuhi about the Juhi flower creeper is one of my favourites. In this poem, he has personified the creeper. He imagines it as a beautiful young girl. . सोनजुही की बेल हठीली  लटकी सधी अधर पर! झालरदार गरारा पहने  स्वर्णिम कलियों के सज गहने  बूटे कढ़ी चुनरी फहरा  शोभा की लहरी-सी लहरा  तारों की-सी छाँह सांवली, सीधे पग धरती न बावली  कोमलता के भार से मरी  अंग भंगिमा भरी, छरहरी! उदि्भद जग की-सी निर्झरिणी हरित नीर, बहती सी टहनी! . Sonjuhi ki bel hathili lataki sadhi adhar par! jhaalardaar gharaara pahne svarnim kaliyon ke saj gahane boote kadhi chunari phaara shobha ki lahari-si lahara taaron ki-si chhaanh saanvli seedhe pag dharati na baavali komalta ke bhaar se mari ang bhangima bhari, chharahari! udibhad jag ki-si nirjharinee harit neer, bahati si tehnee! . Pant ji was a Chhayavadi poet and his poems were bejewelled with metaphors and similies. I find it astonishing how he used one element of nature as the metaphor for another, like in this excerpt he compares a 'cheerful fragment of sunshine' with a bird's chick. . एक धूप का हँसमुख टुकड़ा तरु के हरे झरोखे से झर  अलसाया है धरा धूल पर  चिड़िया के सफ़ेद बच्चे सा! . ek dhoop ka hansmukh tukda taru ke hare jharokhe se jhar alasaaya hai dhara dhool par chidiya ke safed bachche sa . Today's outfit is a Gamosa style Mekhela Sador from @ilika_p. The white in this combination signfies masculine conciousness, Purush and the red signifies Prakrati, the feminine creative force. . I've draped a Mekhela Sador for the first time so please excuse the evident 'Nausikhiyapan'. . . #desidrapes_shadesofred  #desidrapesnavratrispecial 
कंकाल भारतीय समाज के विभिन्न संस्थानों के भीतरी यथार्थ का उद्घाटन करता है। समाज की सतह पर दिखायी पड़ने वाले धर्माचार्यों, समाज-सेवकों, सेवा-संगठनों के द्वारा विधवा और बेबस स्त्रियों के शोषण का एक प्रकार से यह सांकेतिक दस्तावेज हैं।
आकस्मिकता और कौतूहल के साथ-साथ मानव मन के भीतरी पर्तों पर होने वाली हलचल इस उपन्यास को गहराई प्रदान करती है। ह्रदय परिवर्तन और सेवा भावना स्वतंत्रताकालीन मूल्यों से जुड़कर इस उपन्यास में संघर्ष और अनुकूलन को भी सामाजिक कल्याण की दृष्टि का माध्यम बना देते हैं। उपन्यास अपने समय के नेताओं और स्वयंसेवकों के चरित्रांकन के माध्यम से एक दोहरे चरित्रवाली जिस संस्कृति का संकेत करता और बनते हुए जिन मानव संबंधों पर घण्टी और मंगल के माध्यम से जो रोशनी फेंकता है वह आधुनिक यथार्थ की पृष्ठभूमि बन जाता है। सृजनात्मकता की इस सांकेतिक क्षमता के कारण यह उपन्यास यथार्थ के भीतर विद्यमान उन शक्तियों को भी अभिव्यक्त कर सका है जो मनुष्य की जय यात्रा पर विश्वास दिलाती है। .
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यह पुस्तक हमारे बुकस्टोर में उपलब्ध है। बुक क्लब के सदस्यों को इस पुस्तक पर छूट मिलेगी। बुकस्टोर पूरे हफ्ते खुला रहता है, सुबह 11 बजे से शाम के 7 बजे तक.
☎: 011-25709456. 💻:bookstoremayday@gmail.com .
#kankal #jaishankarprasad #hindiliterature #maydaybookstore
कंकाल भारतीय समाज के विभिन्न संस्थानों के भीतरी यथार्थ का उद्घाटन करता है। समाज की सतह पर दिखायी पड़ने वाले धर्माचार्यों, समाज-सेवकों, सेवा-संगठनों के द्वारा विधवा और बेबस स्त्रियों के शोषण का एक प्रकार से यह सांकेतिक दस्तावेज हैं। आकस्मिकता और कौतूहल के साथ-साथ मानव मन के भीतरी पर्तों पर होने वाली हलचल इस उपन्यास को गहराई प्रदान करती है। ह्रदय परिवर्तन और सेवा भावना स्वतंत्रताकालीन मूल्यों से जुड़कर इस उपन्यास में संघर्ष और अनुकूलन को भी सामाजिक कल्याण की दृष्टि का माध्यम बना देते हैं। उपन्यास अपने समय के नेताओं और स्वयंसेवकों के चरित्रांकन के माध्यम से एक दोहरे चरित्रवाली जिस संस्कृति का संकेत करता और बनते हुए जिन मानव संबंधों पर घण्टी और मंगल के माध्यम से जो रोशनी फेंकता है वह आधुनिक यथार्थ की पृष्ठभूमि बन जाता है। सृजनात्मकता की इस सांकेतिक क्षमता के कारण यह उपन्यास यथार्थ के भीतर विद्यमान उन शक्तियों को भी अभिव्यक्त कर सका है जो मनुष्य की जय यात्रा पर विश्वास दिलाती है। . . यह पुस्तक हमारे बुकस्टोर में उपलब्ध है। बुक क्लब के सदस्यों को इस पुस्तक पर छूट मिलेगी। बुकस्टोर पूरे हफ्ते खुला रहता है, सुबह 11 बजे से शाम के 7 बजे तक. ☎: 011-25709456. 💻:bookstoremayday@gmail.com . #kankal  #jaishankarprasad  #hindiliterature  #maydaybookstore 
'अनारकली ऑफ आरा' के लेखक और निर्देशक अविनाश दास जी से एक ख़ास मुलाक़ात । उनको अपनी किताब 'रात के उस पार' भेंट करने के बाद उन्होंने मेरी एक दो कविताएँ पढ़ीं और मेरा हौसला भी बढ़ाया । साथ उन्होंने यह भी कहा कि "मैं तुम्हारी कविताएँ पढ़ूँगा और तुम्हें ज़रूर बताऊँगा कि मुझे कैसी लगीं ।" उनके सरल हृदय और व्यक्तित्व से मैं बहुत प्रभावित हुआ । 
शैलेश जी का बहुत शुक्रिया मुझे ऐसे एक सच्चे कलाकार से मिलवाने के लिए ।

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'अनारकली ऑफ आरा' के लेखक और निर्देशक अविनाश दास जी से एक ख़ास मुलाक़ात । उनको अपनी किताब 'रात के उस पार' भेंट करने के बाद उन्होंने मेरी एक दो कविताएँ पढ़ीं और मेरा हौसला भी बढ़ाया । साथ उन्होंने यह भी कहा कि "मैं तुम्हारी कविताएँ पढ़ूँगा और तुम्हें ज़रूर बताऊँगा कि मुझे कैसी लगीं ।" उनके सरल हृदय और व्यक्तित्व से मैं बहुत प्रभावित हुआ । शैलेश जी का बहुत शुक्रिया मुझे ऐसे एक सच्चे कलाकार से मिलवाने के लिए । #RaatKeUsPaar  #hindiwriter  #hindikavita  #hindiwriters  #hindipoems  #hindipoets  #AnarkaliOfAarah  #Life  #Journey  #instagram  #instapics  #instaart  #instaartist  #instaday  #instatoday  #instadaily  #instapic  #hindiliterature 
यह पुस्तक हमारे बुकस्टोर में उपलब्ध है। बुक क्लब के सदस्यों को इस पुस्तक पर छूट मिलेगी। बुकस्टोर पूरे हफ्ते खुला रहता है, सुबह 11 बजे से शाम के 7 बजे तक.
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सबसे उत्तम कार्य क्या होता है? किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना देना, जरूरतमंद की मदद करना, किसी दुखियारे का दुख हल्का करना और किसी घायल की सेवा करना'। ये अनमोल वचन थे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन अब्दुल कलाम के, जिन्होंने भारत का सर्वोच्च पद संभाला, जिन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान मिला। लेकिन उन्होंने कभी अपने पद की शक्ति का अहंकार नहीं किया। वो हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने 'देश सेवा' और लोगों की सेवा को ही अपना पहला और अंतिम लक्ष्य बना लिया था और उसी पथ पर वो जीवनभर चलते रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई ऐसे अनमोल और प्रेरणादायी वचन कहे हैं, जिन्हें अगर आप आत्मसात कर लें यानी अपनी आत्मा में बिठा लें तो यकीन मानिए इससे आपका भविष्य तो उज्ज्वल होगा ही, साथ ही आपके जीवन को भी ये बेहतर बना देगा। तो चलिए जानते हैं अब्दुल कलाम के वो 10 अनमोल और प्रेरणादायी वचन... 1. ऊंचाई तक जाने के लिए शक्ति अर्थात योग्यता की आवश्यक्ता होती है, चाहे वो  ऊंचाई एवरेस्ट की हो या आपके करियर की। 2. मुश्किलें जिंदगी का हिस्सा हैं। उसके कारण जिंदगी को समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन स्वयं की मदद करें जिससे आप अपनी ताकत को जान सकें। मुश्किलों को भी पता चलने दो कि उसके लिए आप कितने मुश्किल हैं। 3. इंसान को जीवन में मुश्किलों की जरूरत है, क्योंकि यही मुश्किलें सफलता का सुख अनुभव कराती हैं। 4. हमें उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए और न ही खुद को हारने की अनुमति देनी चाहिए। 
5. किसी सपने को पूरा करने के लिए सपने देखना जरूरी है। 6. अपने मिशन में सफल होने के लिए हमें अपने लक्ष्य की ओर एकाग्रचित होकर कार्य करना चाहिए। सफलता जरूर मिलेगी। 7. अंग्रेजी बहुत आवश्यक है। वर्तमान समय में विज्ञान संबंधी मूल ज्ञान अंग्रेजी में ही मौजूद हैं। लेकिन मुझे विश्वास है कि कुछ दशक बाद हमारी भाषा में भी विज्ञान का मूल ज्ञान होगा और उस समय हम भी जापानियों जैसे परिवर्तन कर पाएंगे। 8. धर्म की स्थापना के लिए किसी को मारना, किसी धर्म में इसका उल्लेख नहीं है। 9. भगवान जो हमारे निर्माता हैं, उन्होंने हमारे मन, दिमाग और व्यक्तित्व को कई शक्तियां और योग्यता दी हैं। प्रार्थना हमें अपनी शक्तियों को बढ़ाने में हमारी मदद करती है, इसलिए प्रार्थना करें। 10. एक अच्छी किताब सौ दोस्तों के समान है, पर एक अच्छा दोस्त पूरे पुस्तकालय (लाइब्रेरी) के बराबर होता है। इसलिए बेहतर है कि एक अच्छा दोस्त बनाएं।
सबसे उत्तम कार्य क्या होता है? किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना देना, जरूरतमंद की मदद करना, किसी दुखियारे का दुख हल्का करना और किसी घायल की सेवा करना'। ये अनमोल वचन थे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन अब्दुल कलाम के, जिन्होंने भारत का सर्वोच्च पद संभाला, जिन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान मिला। लेकिन उन्होंने कभी अपने पद की शक्ति का अहंकार नहीं किया। वो हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने 'देश सेवा' और लोगों की सेवा को ही अपना पहला और अंतिम लक्ष्य बना लिया था और उसी पथ पर वो जीवनभर चलते रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई ऐसे अनमोल और प्रेरणादायी वचन कहे हैं, जिन्हें अगर आप आत्मसात कर लें यानी अपनी आत्मा में बिठा लें तो यकीन मानिए इससे आपका भविष्य तो उज्ज्वल होगा ही, साथ ही आपके जीवन को भी ये बेहतर बना देगा। तो चलिए जानते हैं अब्दुल कलाम के वो 10 अनमोल और प्रेरणादायी वचन... 1. ऊंचाई तक जाने के लिए शक्ति अर्थात योग्यता की आवश्यक्ता होती है, चाहे वो ऊंचाई एवरेस्ट की हो या आपके करियर की। 2. मुश्किलें जिंदगी का हिस्सा हैं। उसके कारण जिंदगी को समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन स्वयं की मदद करें जिससे आप अपनी ताकत को जान सकें। मुश्किलों को भी पता चलने दो कि उसके लिए आप कितने मुश्किल हैं। 3. इंसान को जीवन में मुश्किलों की जरूरत है, क्योंकि यही मुश्किलें सफलता का सुख अनुभव कराती हैं। 4. हमें उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए और न ही खुद को हारने की अनुमति देनी चाहिए। 5. किसी सपने को पूरा करने के लिए सपने देखना जरूरी है। 6. अपने मिशन में सफल होने के लिए हमें अपने लक्ष्य की ओर एकाग्रचित होकर कार्य करना चाहिए। सफलता जरूर मिलेगी। 7. अंग्रेजी बहुत आवश्यक है। वर्तमान समय में विज्ञान संबंधी मूल ज्ञान अंग्रेजी में ही मौजूद हैं। लेकिन मुझे विश्वास है कि कुछ दशक बाद हमारी भाषा में भी विज्ञान का मूल ज्ञान होगा और उस समय हम भी जापानियों जैसे परिवर्तन कर पाएंगे। 8. धर्म की स्थापना के लिए किसी को मारना, किसी धर्म में इसका उल्लेख नहीं है। 9. भगवान जो हमारे निर्माता हैं, उन्होंने हमारे मन, दिमाग और व्यक्तित्व को कई शक्तियां और योग्यता दी हैं। प्रार्थना हमें अपनी शक्तियों को बढ़ाने में हमारी मदद करती है, इसलिए प्रार्थना करें। 10. एक अच्छी किताब सौ दोस्तों के समान है, पर एक अच्छा दोस्त पूरे पुस्तकालय (लाइब्रेरी) के बराबर होता है। इसलिए बेहतर है कि एक अच्छा दोस्त बनाएं।
प्रेम बनी एक कविता | --------------------
तुम्हारा यूँ इश्क़ की गली में चले आना
तो बनी एक कविता
नजरों का नजरों से यूँ टकरा जाना
तो बनी एक कविता
तुम्हारा यूँ रूठना हमारा मनाना
तो बनी एक कविता
गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होठों से कुछ कह जाना
तो बनी एक कविता
तुम्हारा यूँ देखकर पलकों का झपकना 
तो बनी एक कविता
रात के आगोश में लिपटे हुए तुम्हे ख्वाबों में यूँ तकना
तो बनी एक कविता

यूँ ही हमसे तुम्हारा मिलना जुलना
तो बनी एक कविता
पेन की नोंक को यूँ कागज़ में गोल-गोल घुमाना
तो बनी एक कविता
गुलाबी गालों को चूमती हुई लटों का यूँ हटाना
तो बनी एक कविता
देखकर हमें यूँ अनदेखा कर जाना
तो बनी एक कविता
जरा सी मंजूरी का एहसास दे जाना
तो बनी एक कविता
थोड़ा इश्क़ में कभी आना-बाना 
तो बनी एक कविता
बातों बातों में यूँ कहा सुनी हो जाना
तो बनी एक कविता
तुम्हारा यूँ गुस्से में ना मिलने का बनाना बहाना
तो बनी एक कविता

रातों की नींद का यूँ उड़ जाना
तो बनी एक कविता
यादों को भुलाए न भूल पाना
तो बनी एक कविता
तकिये के पीछे यूँ आँसुओं का बह जाना
तो बनी एक कविता
लबों तक आए आँसुओ को पी जाना
तो बनी एक कविता
ख़ामोश भरी रातों में यूँ छत को एकटुक देखना
तो बनी एक कविता
जब संभाले दिल संभल न पाना
तो बनी एक कविता
जरा सा भी इश्क़ को समझ न पाना
तो बनी एक कविता
यूँ हमसे तुम्हारा ख़ामोश सा हो जाना
तो बनी एक कविता... © सचिन ओम गुप्ता
Sachin Om Gupta
प्रेम बनी एक कविता | -------------------- तुम्हारा यूँ इश्क़ की गली में चले आना तो बनी एक कविता नजरों का नजरों से यूँ टकरा जाना तो बनी एक कविता तुम्हारा यूँ रूठना हमारा मनाना तो बनी एक कविता गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होठों से कुछ कह जाना तो बनी एक कविता तुम्हारा यूँ देखकर पलकों का झपकना तो बनी एक कविता रात के आगोश में लिपटे हुए तुम्हे ख्वाबों में यूँ तकना तो बनी एक कविता यूँ ही हमसे तुम्हारा मिलना जुलना तो बनी एक कविता पेन की नोंक को यूँ कागज़ में गोल-गोल घुमाना तो बनी एक कविता गुलाबी गालों को चूमती हुई लटों का यूँ हटाना तो बनी एक कविता देखकर हमें यूँ अनदेखा कर जाना तो बनी एक कविता जरा सी मंजूरी का एहसास दे जाना तो बनी एक कविता थोड़ा इश्क़ में कभी आना-बाना तो बनी एक कविता बातों बातों में यूँ कहा सुनी हो जाना तो बनी एक कविता तुम्हारा यूँ गुस्से में ना मिलने का बनाना बहाना तो बनी एक कविता रातों की नींद का यूँ उड़ जाना तो बनी एक कविता यादों को भुलाए न भूल पाना तो बनी एक कविता तकिये के पीछे यूँ आँसुओं का बह जाना तो बनी एक कविता लबों तक आए आँसुओ को पी जाना तो बनी एक कविता ख़ामोश भरी रातों में यूँ छत को एकटुक देखना तो बनी एक कविता जब संभाले दिल संभल न पाना तो बनी एक कविता जरा सा भी इश्क़ को समझ न पाना तो बनी एक कविता यूँ हमसे तुम्हारा ख़ामोश सा हो जाना तो बनी एक कविता... © सचिन ओम गुप्ता Sachin Om Gupta
"खुद को खुद ही छल रहे हैं।।"
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कभी नहीं सोचा था तो अब सोच लो।
हम्म...। वैसे तुम्हें नहीं लगता कि तुम कभी-कभी बहुत ज़्यादा सोचते हो? मुझे पता है ज़िन्दगी बहुत उलझी हुई है। लेकिन उसके हर सिरे को समझने की कोशिश करना हीं अपने आप में नासमझी हैआ
मुझे नहीं पता मेरे दिमाग़ में जो बातें आयी मैंने बोल दी।
मैं मानती हूँ कि तुम ईमानदारी से अपनी भावनाएँ रख देते हो। लेकिन, विचारों पर काम करने की ज़रूरत है। जीवन में जो चीज़ें जैसे आती हैं उसे वैसे हीं लेना चाहिए। सबसे पहले तो हमें प्रथमकताएँ समझनी चाहिए। क्यूँकि तुम कोशिश चाहे जितनी भी कर लो, कोई ना कोई छोर अनछुईं रह हीं जाती हैं। तो मुझे बस ये लगता है कि चीज़ें जैसे हमारे सामने आती हैं हमें उसी हिसाब से अपना बर्ताव रखना चाहिए।
अब मैं क्या करूँ। तुम्हें पता है मैं ऐसा हीं हूँ।
लेकिन तुमने ये नहीं देखा कि तुम्हारे आस-पास बहुत से ऐसे लोग हैं, जो तुम्हारी फ़िक्र करते हैं। तुम्हारे बारे में सोचते हैं।
ये भी मुझे पता है लेकिन कभी-कभी बस तन्हाई मेरी साथी होती है और किसी और को मैं चाहता भी नहीं अपने आस-पास। तो ये समस्या है मेरे साथ।
तुम अपने आस-पास की अच्छाईयों को देखना शुरू करो, ग़ौर करना शुरू करो सब अच्छा हीं लगेगा।
आज की तैयारी और लोगों को अपने आस-पास देख के लगता है कि तुम सही कह रही हो। पर पता नहीं फिर भी दिल यूँ हीं कभी परेशान हो जाता है। सब परेशानियों को दरकिनार करके फ़िलहाल एक अच्छी नींद ले लो, बाक़ी सब ठीक हो जाएगा।
पता नहीं।
- (भास्कर विश्वनाथन)
#storyoftheday #story #kahani @atrangeere #hindi #hindistory #hindiwriters #hindiwritings #hindistan #hindiliterature #bloggerstyle #blogger #blog #nanapatekar #tanushreedutta #storytime #foodporn #foodporn #foodphotography #chicken #mutton #salad #starter #bhaskervishwanathan #love #writer #bhaskervishwanathan #love #atrangeere #abhiparaswrites @bhaskervishwanathan
कभी नहीं सोचा था तो अब सोच लो। हम्म...। वैसे तुम्हें नहीं लगता कि तुम कभी-कभी बहुत ज़्यादा सोचते हो? मुझे पता है ज़िन्दगी बहुत उलझी हुई है। लेकिन उसके हर सिरे को समझने की कोशिश करना हीं अपने आप में नासमझी हैआ मुझे नहीं पता मेरे दिमाग़ में जो बातें आयी मैंने बोल दी। मैं मानती हूँ कि तुम ईमानदारी से अपनी भावनाएँ रख देते हो। लेकिन, विचारों पर काम करने की ज़रूरत है। जीवन में जो चीज़ें जैसे आती हैं उसे वैसे हीं लेना चाहिए। सबसे पहले तो हमें प्रथमकताएँ समझनी चाहिए। क्यूँकि तुम कोशिश चाहे जितनी भी कर लो, कोई ना कोई छोर अनछुईं रह हीं जाती हैं। तो मुझे बस ये लगता है कि चीज़ें जैसे हमारे सामने आती हैं हमें उसी हिसाब से अपना बर्ताव रखना चाहिए। अब मैं क्या करूँ। तुम्हें पता है मैं ऐसा हीं हूँ। लेकिन तुमने ये नहीं देखा कि तुम्हारे आस-पास बहुत से ऐसे लोग हैं, जो तुम्हारी फ़िक्र करते हैं। तुम्हारे बारे में सोचते हैं। ये भी मुझे पता है लेकिन कभी-कभी बस तन्हाई मेरी साथी होती है और किसी और को मैं चाहता भी नहीं अपने आस-पास। तो ये समस्या है मेरे साथ। तुम अपने आस-पास की अच्छाईयों को देखना शुरू करो, ग़ौर करना शुरू करो सब अच्छा हीं लगेगा। आज की तैयारी और लोगों को अपने आस-पास देख के लगता है कि तुम सही कह रही हो। पर पता नहीं फिर भी दिल यूँ हीं कभी परेशान हो जाता है। सब परेशानियों को दरकिनार करके फ़िलहाल एक अच्छी नींद ले लो, बाक़ी सब ठीक हो जाएगा। पता नहीं। - (भास्कर विश्वनाथन) #storyoftheday  #story  #kahani  @atrangeere #hindi  #hindistory  #hindiwriters  #hindiwritings  #hindistan  #hindiliterature  #bloggerstyle  #blogger  #blog  #nanapatekar  #tanushreedutta  #storytime  #foodporn  #foodporn  #foodphotography  #chicken  #mutton  #salad  #starter  #bhaskervishwanathan  #love  #writer  #bhaskervishwanathan  #love  #atrangeere  #abhiparaswrites  @bhaskervishwanathan
इत्र नहीं हैं जो छू कर घुल जाएंगे....कांटा हैं...चुभकर याद आएंगे।। 😂😜
@jazbaat_ki_kalam_se .
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Shades of Red
Day 4 : Karuna (Compassion, sensitivity and melancholy) and Mahadevi Varma
.
Madder Ajrakh Skirt: @fabindianews
Kotpad stole: @ajiolife
Jewellery :@studio.tar
.
Mahadevi Verma was called Adhunik yug ki Meera (Modern Meera) for the expression of वियोग l Viyog (seperation and longing) in her poetry. Her poems interpret melancholy and longing in the most enchanting way. करुणा। Karuna and the ability to let tears flow freely is a feminine trait. This trait makes a person more generous and also resilient. Mahadevi ji's poetry epitomizes Karuna, tears were her favourite metaphor. In one of her most famous works, she calls heself a 'Tear-filled cloud of sadness' : .
मैं नीर भरी दु:ख की बदली!
स्पंदन में चिर निस्पंद बसा,
क्रन्दन में आहत विश्व हंसा,
नयनों में दीपक से जलते,
पलकों में निर्झरिणी मचली!
Main neer bhari dukh ki badalee!
spandan mein chir nispand basa,
krandan mein aahat vishv hansa,
nayanon mein deepak se jalate,
palakon mein nirjharini machali!
.
.
In another poem she describes the beauty of love in separation and longing. The idea of वियोग में संयोग । Viyog mein Sanyog (Togetherness even in separation)
.
नयन में जिसके जलद वह तृषित चातक हूँ,
शलभ जिसके प्राण में वह निठुर दीपक हूँ,
फूल को उर में छिपाए विकल बुलबुल हूँ,
एक होकर दूर तन से छाँह वह चल हूँ,
दूर तुमसे हूँ अखण्ड सुहागिनी भी हूँ!
बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ!
Nayan mein jiske jalad vah trshit chaatak hun,
shalabh jiske pran mein vah nithur deepak hun,
phool ko ur mein chhipae vikal bulbul hun,
ek hokar door tan se chhaanh vah chal hun,
door tumase hoon akhand suhaagini bhi hun!
been bhi hun main tumhari raagini bhi hun!
.
The red colour of love in Mahadevi ji's poetry is deeper and darker but it's red nonetheless. That's why I chose this subtle, earthy red for her. The madder red in the skirt and the Kotpad stole symbolizes the beauty and pain of Viyog in love. The flowers in hair are white, symbol of Karuna. The jewel is symbolic of Mahadevi ji's heavily embellished language. She was a छायावादी | Chhayavadi poet. Her language was refined and laden with metaphor. .
.
I have a Garba party in my office today so I changed the top in the evening. .
#desidrapes_shadesofred
Shades of Red Day 4 : Karuna (Compassion, sensitivity and melancholy) and Mahadevi Varma . Madder Ajrakh Skirt: @fabindianews Kotpad stole: @ajiolife Jewellery :@studio.tar . Mahadevi Verma was called Adhunik yug ki Meera (Modern Meera) for the expression of वियोग l Viyog (seperation and longing) in her poetry. Her poems interpret melancholy and longing in the most enchanting way. करुणा। Karuna and the ability to let tears flow freely is a feminine trait. This trait makes a person more generous and also resilient. Mahadevi ji's poetry epitomizes Karuna, tears were her favourite metaphor. In one of her most famous works, she calls heself a 'Tear-filled cloud of sadness' : . मैं नीर भरी दु:ख की बदली! स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रन्दन में आहत विश्व हंसा, नयनों में दीपक से जलते, पलकों में निर्झरिणी मचली! Main neer bhari dukh ki badalee! spandan mein chir nispand basa, krandan mein aahat vishv hansa, nayanon mein deepak se jalate, palakon mein nirjharini machali! . . In another poem she describes the beauty of love in separation and longing. The idea of वियोग में संयोग । Viyog mein Sanyog (Togetherness even in separation) . नयन में जिसके जलद वह तृषित चातक हूँ, शलभ जिसके प्राण में वह निठुर दीपक हूँ, फूल को उर में छिपाए विकल बुलबुल हूँ, एक होकर दूर तन से छाँह वह चल हूँ, दूर तुमसे हूँ अखण्ड सुहागिनी भी हूँ! बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ! Nayan mein jiske jalad vah trshit chaatak hun, shalabh jiske pran mein vah nithur deepak hun, phool ko ur mein chhipae vikal bulbul hun, ek hokar door tan se chhaanh vah chal hun, door tumase hoon akhand suhaagini bhi hun! been bhi hun main tumhari raagini bhi hun! . The red colour of love in Mahadevi ji's poetry is deeper and darker but it's red nonetheless. That's why I chose this subtle, earthy red for her. The madder red in the skirt and the Kotpad stole symbolizes the beauty and pain of Viyog in love. The flowers in hair are white, symbol of Karuna. The jewel is symbolic of Mahadevi ji's heavily embellished language. She was a छायावादी | Chhayavadi poet. Her language was refined and laden with metaphor. . . I have a Garba party in my office today so I changed the top in the evening. . #desidrapes_shadesofred 
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदहारण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का ! शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियां कलात्मक भी होती हैं और मर्मस्पर्शी भी ! अन्तेर्मन की गहरी परतें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियां शिवानी की अपनी मौलिक पहचान है जिसके कारन उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ ! इनकी कहानियां न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियां हैं, बल्कि रोचक भी इतनी हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही नहीं पाते ! प्रस्तुत संग्रह में तोप, मधुयामिनी, प्रतिशोध, मरण सागर पारे, गजदंत, मित्र, दादी, भीलनी, चलोगी चन्द्रिका? एवं गन्धारी कहानियां संकलित हैं ! हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है ! कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियां हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नयी पीढ़ी अवश्य पढना चाहेगी !
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यह पुस्तक हमारे बुकस्टोर में उपलब्ध है। बुक क्लब के सदस्यों को इस पुस्तक पर छूट मिलेगी। बुकस्टोर पूरे हफ्ते खुला रहता है, सुबह 11 बजे से शाम के 7 बजे तक.
☎: 011-25709456. 💻:bookstoremayday@gmail.com .

#maydaybookstore #shivani #madhuyamini #hindiliterature
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदहारण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का ! शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियां कलात्मक भी होती हैं और मर्मस्पर्शी भी ! अन्तेर्मन की गहरी परतें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियां शिवानी की अपनी मौलिक पहचान है जिसके कारन उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ ! इनकी कहानियां न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियां हैं, बल्कि रोचक भी इतनी हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही नहीं पाते ! प्रस्तुत संग्रह में तोप, मधुयामिनी, प्रतिशोध, मरण सागर पारे, गजदंत, मित्र, दादी, भीलनी, चलोगी चन्द्रिका? एवं गन्धारी कहानियां संकलित हैं ! हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है ! कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियां हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नयी पीढ़ी अवश्य पढना चाहेगी ! . . यह पुस्तक हमारे बुकस्टोर में उपलब्ध है। बुक क्लब के सदस्यों को इस पुस्तक पर छूट मिलेगी। बुकस्टोर पूरे हफ्ते खुला रहता है, सुबह 11 बजे से शाम के 7 बजे तक. ☎: 011-25709456. 💻:bookstoremayday@gmail.com . #maydaybookstore  #shivani  #madhuyamini  #hindiliterature 
*क्यों*
.

बेपरवाह 
बेकद्र
बेहया 
बेशर्म 
बेशक कहती रही वो, पर 
बेहद ढीठ था,
बेइंतेहा मोहब्बत करता रहा मैं। .

बेइंतेहा की इन्तेहा आई एक दिन 
बेदर्द होना पड़ा उस दिन उसे, और आज 
बेमतलब रोती है वो। .

बेशुमार फूल मेरी कब्र पर रख, 
बेईमान बोलती है वो।
.

बेमतलब की इन्कारी को इकरारी में बदलने का वक़्त जो नहीं दिया।
बेअदबी से उसके इज़हार से पहले चला जो गया। .

बेसब्री में उसके हाँ का इंतज़ार जो नहीं किया, इसलिए
बेवक़्त मौत के लिए 
बेवफ़ा बोलती है वो। .

बेशक वो नहीं जानती कि मैं आज भी
बेहद ढीठ हूँ। .

बेबस भी हूँ खैर, और ये 
बेबसी चिल्ला-चिल्लाकर पूछना चाहती है- बेपनाह प्यार करने वालों का प्यार उनकी मौत के बाद ही क्यों समझ आता है? बेखुदी उनकी मौत के बाद ही क्यों होश में आती है? बेख्याली उनकी मौत के बाद ही क्यों खलती है? बेदिली उनकी मौत के बाद ही क्यों पिघलती है?
क्यों?
. ~हीना गनोत्रा
*क्यों* . बेपरवाह बेकद्र बेहया बेशर्म बेशक कहती रही वो, पर बेहद ढीठ था, बेइंतेहा मोहब्बत करता रहा मैं। . बेइंतेहा की इन्तेहा आई एक दिन बेदर्द होना पड़ा उस दिन उसे, और आज बेमतलब रोती है वो। . बेशुमार फूल मेरी कब्र पर रख, बेईमान बोलती है वो। . बेमतलब की इन्कारी को इकरारी में बदलने का वक़्त जो नहीं दिया। बेअदबी से उसके इज़हार से पहले चला जो गया। . बेसब्री में उसके हाँ का इंतज़ार जो नहीं किया, इसलिए बेवक़्त मौत के लिए बेवफ़ा बोलती है वो। . बेशक वो नहीं जानती कि मैं आज भी बेहद ढीठ हूँ। . बेबस भी हूँ खैर, और ये बेबसी चिल्ला-चिल्लाकर पूछना चाहती है- बेपनाह प्यार करने वालों का प्यार उनकी मौत के बाद ही क्यों समझ आता है? बेखुदी उनकी मौत के बाद ही क्यों होश में आती है? बेख्याली उनकी मौत के बाद ही क्यों खलती है? बेदिली उनकी मौत के बाद ही क्यों पिघलती है? क्यों? . ~हीना गनोत्रा
झूठ हर कोई बोल रहा है, पर सच्चाई सब को मालूम है। #hindikavita #hindiwriters #hindi_poetry #hindilines #hindiliterature #hindi #india
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-लेकिन हम कितने लोग हैं जो जीते जी ऐसा सोच पाते हैं सच में।
-जितने भी लोग हैं उन्हीं की वजह से तो आज चीज़ें जैसी हैं वैसी हैं।
-पूरी उम्र हम ना जाने कैसी चीज़ों के पीछे भागते रहते हैं, और जीवन के आख़िरी पलों में हम यह समझ पाते हैं कि जो कुछ भी किया वह सब व्यर्थ था। हमने ज़िंदगी में कहानियाँ तो बहुत बनाई लेकिन, भूल गए बस उस ज़िंदगी में एक कहानी को आत्म तृप्ति के लिए जीना।
-तुम जानती हो ना दुनिया के लिए सफलता की परिभाषा क्या है?
-मैं जानती हूँ कि दुनिया कितना ग़लत सोचती है।
-मुझे तो यह भी लगता है कि जीवन कितना सरल है ना?
-सरल कैसे?
-सरल यूँ कि हम इसके बारे में जितना कम सोचेंगे उतनी आसानी से हम जीवन को जी पाएँगे। मतलब जीवन को महशुस कर पायेंगे।
-बिलकुल जैसे इस कलाकृति को देखते हुए बस हम सपनों के एक जहाँ में खो जाते हैं।
-तो क्या कला हाई जीवन है?
-कला जीवन नहीं है लेकिन हाँ कला जीवन को आसान बना देते हैं।
- (भास्कर विश्वनाथन)
#storyoftheday #kahani #story @atrangeere 
#Hindi #hindiliteraturefestival #hindiliterature #mumbai #blog #blogger #instacongers #hindistan #jaipur #timeslightly #mumbai #artwork #movie #artists #artworks
-लेकिन हम कितने लोग हैं जो जीते जी ऐसा सोच पाते हैं सच में। -जितने भी लोग हैं उन्हीं की वजह से तो आज चीज़ें जैसी हैं वैसी हैं। -पूरी उम्र हम ना जाने कैसी चीज़ों के पीछे भागते रहते हैं, और जीवन के आख़िरी पलों में हम यह समझ पाते हैं कि जो कुछ भी किया वह सब व्यर्थ था। हमने ज़िंदगी में कहानियाँ तो बहुत बनाई लेकिन, भूल गए बस उस ज़िंदगी में एक कहानी को आत्म तृप्ति के लिए जीना। -तुम जानती हो ना दुनिया के लिए सफलता की परिभाषा क्या है? -मैं जानती हूँ कि दुनिया कितना ग़लत सोचती है। -मुझे तो यह भी लगता है कि जीवन कितना सरल है ना? -सरल कैसे? -सरल यूँ कि हम इसके बारे में जितना कम सोचेंगे उतनी आसानी से हम जीवन को जी पाएँगे। मतलब जीवन को महशुस कर पायेंगे। -बिलकुल जैसे इस कलाकृति को देखते हुए बस हम सपनों के एक जहाँ में खो जाते हैं। -तो क्या कला हाई जीवन है? -कला जीवन नहीं है लेकिन हाँ कला जीवन को आसान बना देते हैं। - (भास्कर विश्वनाथन) #storyoftheday  #kahani  #story  @atrangeere #Hindi  #hindiliteraturefestival  #hindiliterature  #mumbai  #blog  #blogger  #instacongers  #hindistan  #jaipur  #timeslightly  #mumbai  #artwork  #movie  #artists  #artworks 
तुमने कहा मैंने गलत किया, गलत किया तुम्हें यूं तनहा छोड़ कर, गलत किया वो सारी कसमें तोड़ कर, गलत किया किसी और का हो कर। गलत तो तुमने भी किया ना, मुझे ना रोक कर, मेरी कसमों को टूटता देख अपनी भी कसमें तोड़ कर, आज नहीं तो कल, बन तो तुम भी किसी और के ही जाओगे, क्या वो गलत नहीं होगा?
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गलत देखा जाये तो सब है और सोचा जाये, तो कुछ भी नहीं। गलत तो बेवफाई भी है और किसी को शिद्दत से प्यार करना भी। गलत तो अपने माँ बाप से झूठ बोलकर तुमसे मिलना भी था और गलत तो तुमसे बहाना कर अपने दोस्तों के साथ घूमना भी।
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गलत तो तुम्हें अकेले छोड़ के आगे बढ़ जाना भी था और गलत तो अपने पति के साथ रहकर आज भी तुमसे प्यार करना है। गलत तो दुनिया के लिए, तुम्हारे साथ काले आसमान के नीचे लेटकर तारे गिनना भी था और गलत तो अपनी मर्ज़ी के बिना अपने पति के साथ बंद कमरे में रहना भी है। गलत तो तुमसे सात वादे करके, किसी और के साथ सात फेरे लेना भी था और गलत अपने माँ बाप को शर्मिंदा कर तुम्हारे साथ भाग जाना भी होता।
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गलत तो अपने बच्चों को प्यार में पड़ने से रोकना भी है और गलत तो जब खुद बच्चे थे तब प्यार करना भी था। शायद, गलत की कोई परिभाषा ही नहीं है।
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गलत तो ये ख़त भी है, जो तुम्हारे लिए लिखा गया है और इसे लिख कर भी तुम्हें कभी ना भेजना, ये भी तो गलत होगा। पर पता है सही क्या है, इस ख़त में लिखा हुआ एक-एक अलफ़ाज़। आज भी तुमसे ये ख़ामोशी का रिश्ता कायम रखना शायद गलत है पर ना जाने क्यों ये सही लगता है, ठीक उसी तरह जैसे तुम्हारे साथ बितायी हर गलत याद आज भी मुझे सही लगती है।
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#hindiprose #hindiliteratureisamazing #hindiliterature #hindiwriters #writersofhindi #hindiwordsgram #hindiyugm #poemsofindia
तुमने कहा मैंने गलत किया, गलत किया तुम्हें यूं तनहा छोड़ कर, गलत किया वो सारी कसमें तोड़ कर, गलत किया किसी और का हो कर। गलत तो तुमने भी किया ना, मुझे ना रोक कर, मेरी कसमों को टूटता देख अपनी भी कसमें तोड़ कर, आज नहीं तो कल, बन तो तुम भी किसी और के ही जाओगे, क्या वो गलत नहीं होगा? . . गलत देखा जाये तो सब है और सोचा जाये, तो कुछ भी नहीं। गलत तो बेवफाई भी है और किसी को शिद्दत से प्यार करना भी। गलत तो अपने माँ बाप से झूठ बोलकर तुमसे मिलना भी था और गलत तो तुमसे बहाना कर अपने दोस्तों के साथ घूमना भी। . . गलत तो तुम्हें अकेले छोड़ के आगे बढ़ जाना भी था और गलत तो अपने पति के साथ रहकर आज भी तुमसे प्यार करना है। गलत तो दुनिया के लिए, तुम्हारे साथ काले आसमान के नीचे लेटकर तारे गिनना भी था और गलत तो अपनी मर्ज़ी के बिना अपने पति के साथ बंद कमरे में रहना भी है। गलत तो तुमसे सात वादे करके, किसी और के साथ सात फेरे लेना भी था और गलत अपने माँ बाप को शर्मिंदा कर तुम्हारे साथ भाग जाना भी होता। . . गलत तो अपने बच्चों को प्यार में पड़ने से रोकना भी है और गलत तो जब खुद बच्चे थे तब प्यार करना भी था। शायद, गलत की कोई परिभाषा ही नहीं है। . . गलत तो ये ख़त भी है, जो तुम्हारे लिए लिखा गया है और इसे लिख कर भी तुम्हें कभी ना भेजना, ये भी तो गलत होगा। पर पता है सही क्या है, इस ख़त में लिखा हुआ एक-एक अलफ़ाज़। आज भी तुमसे ये ख़ामोशी का रिश्ता कायम रखना शायद गलत है पर ना जाने क्यों ये सही लगता है, ठीक उसी तरह जैसे तुम्हारे साथ बितायी हर गलत याद आज भी मुझे सही लगती है। . . #hindiprose  #hindiliteratureisamazing  #hindiliterature  #hindiwriters  #writersofhindi  #hindiwordsgram  #hindiyugm  #poemsofindia 
नाम जब कृष्ण का आता है..
तो कलम हमारी चलती नहीं...
थिरकने लगती है...
और थिरकती हुई कलम..
महज़ अल्फाज़ नहीं बनती..
चित्र भी बनाती है ।।
@jazbaat_ki_kalam_se .
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#harekrishna #lordkrishna💕 #poetry #shayri #mirakee #hindi #writersofinstagram #hindiwriters #igwriter #hindipoetry #writersofindia #hindiliterature
नाम जब कृष्ण का आता है.. तो कलम हमारी चलती नहीं... थिरकने लगती है... और थिरकती हुई कलम.. महज़ अल्फाज़ नहीं बनती.. चित्र भी बनाती है ।। @jazbaat_ki_kalam_se . . . . . #harekrishna  #lordkrishna 💕 #poetry  #shayri  #mirakee  #hindi  #writersofinstagram  #hindiwriters  #igwriter  #hindipoetry  #writersofindia  #hindiliterature 
Shades of Red
Day 3 : Samvedna (sensitivity) and Maithili Sharan Gupt .
Saree : @onnyorong
Jewellery : @studio.tar
.
Gupt ji was a poet whose poems emphasisied on humanity. His most famous lines are :
यही पशु–प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे¸
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।
Yahi pashu–pravratti hai ki aap aap hi chare¸ vahi manushya hai ki jo manushya ke lie mare.
(Self-centeredness is a trait of animals, the real humans are ready to sacrifice themselves for fellow humans)
.
His sensitivity, towards neglected female characters from history and mythology, is what I admire. He wrote from the point of view of Gautama Buddha's wife 'Yashodhara' and Lakshmana's wife 'Urmila'. Their husbands are considered great men but no one before Gupt ji had written much about the plight of their wives. 'Sakhi ve mujhse kehkar jaate' where Yashodhara wonders why her husband couldn't tell her before he left in search of enlightenment, is the most popular poem from the kavya-granth Yashodhara. His poem 'Sairandhree' about Draupadi when she had taken the disguise of a royal hairdresser is my favourite. Kichak, the queen's brother starts harrasing her, she seeks help from the royal court but even the king seems incabaple of saving her. In these lines Draupadi questions the abilities of a king who cannot evenkeep the women of his court safe :
भय पाती है जहाँ राजगृह में ही नारी,
होता अत्याचार यथा उस पर है भारी।
सब प्रकार विपरीत जहाँ की रीति निहारी,
अधिकारी ही जहाँ आप हैं अत्याचारी।
लज्जा रहनी अति कठिन है कुल-वधुओं की भी जहाँ,
हे! मत्स्यराज, किस भाँति तुम हुए प्रजा-रंजक वहाँ।
Bhay paati hai jahaan rajagrh mein hi naari
Hota atyaachaar yatha us par hai bhaari
Sab prakaar vipreet jahaan ki reeti nihari
Adhikaari hi jahaan aap hain atyaachaari.
lajja rehni ati kathin hai kul-vadhuon ki bhijahaan,
Hey! Matsyaraaj, kis bhaanti tum hue praja-ranjak vahaan?
.
Gupt ji's characters might not seem progressive in contemporary context but his work should be evaluated keeping in mind his times. 
The inspiration for the outfit was Gupt ji's ancient Indian characters including the gold-toned jewels, the motifs and the marigolds.

#desidrapes_shadesofred
Shades of Red Day 3 : Samvedna (sensitivity) and Maithili Sharan Gupt . Saree : @onnyorong Jewellery : @studio.tar . Gupt ji was a poet whose poems emphasisied on humanity. His most famous lines are : यही पशु–प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे¸ वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। Yahi pashu–pravratti hai ki aap aap hi chare¸ vahi manushya hai ki jo manushya ke lie mare. (Self-centeredness is a trait of animals, the real humans are ready to sacrifice themselves for fellow humans) . His sensitivity, towards neglected female characters from history and mythology, is what I admire. He wrote from the point of view of Gautama Buddha's wife 'Yashodhara' and Lakshmana's wife 'Urmila'. Their husbands are considered great men but no one before Gupt ji had written much about the plight of their wives. 'Sakhi ve mujhse kehkar jaate' where Yashodhara wonders why her husband couldn't tell her before he left in search of enlightenment, is the most popular poem from the kavya-granth Yashodhara. His poem 'Sairandhree' about Draupadi when she had taken the disguise of a royal hairdresser is my favourite. Kichak, the queen's brother starts harrasing her, she seeks help from the royal court but even the king seems incabaple of saving her. In these lines Draupadi questions the abilities of a king who cannot evenkeep the women of his court safe : भय पाती है जहाँ राजगृह में ही नारी, होता अत्याचार यथा उस पर है भारी। सब प्रकार विपरीत जहाँ की रीति निहारी, अधिकारी ही जहाँ आप हैं अत्याचारी। लज्जा रहनी अति कठिन है कुल-वधुओं की भी जहाँ, हे! मत्स्यराज, किस भाँति तुम हुए प्रजा-रंजक वहाँ। Bhay paati hai jahaan rajagrh mein hi naari Hota atyaachaar yatha us par hai bhaari Sab prakaar vipreet jahaan ki reeti nihari Adhikaari hi jahaan aap hain atyaachaari. lajja rehni ati kathin hai kul-vadhuon ki bhijahaan, Hey! Matsyaraaj, kis bhaanti tum hue praja-ranjak vahaan? . Gupt ji's characters might not seem progressive in contemporary context but his work should be evaluated keeping in mind his times. The inspiration for the outfit was Gupt ji's ancient Indian characters including the gold-toned jewels, the motifs and the marigolds. #desidrapes_shadesofred 
*बचपन की यादें*
.

बाल काटने वाले भैया की ऊँची कुर्सी पर,
जब अपने छोटे-छोटे पैर नहीं आते थे,
और धम्म से अपन सीट के भीतर धँस जाते थे।
.

तब कुर्सी के दो हत्थों के ऊपर, 
उसी नाप की लकड़ी वाली एक पुरानी पाट रखी जाती थी।
जिस पर बैठ कर अपन को राजा-सी फ़ीलिंग आती थी।
आस-पास की दुनिया के मुक़ाबले अपना क़द बढ़-सा जाता था।
.

लगता था जैसे अब हम सारे जग से ऊँचे हैं,
और होंठ के ऊपर आए बाल लगते थे जैसे मूँछें हैं।
.

कितना कठिन वक़्त होता था, काटे नहीं कटता था,
स्प्रे-मग के पानी की बारिश चौंका ही जाती थी।
कान के पीछे चलती कैंची, गुदगुदी मचाती थी।
.

पापा की ऊँगली थामे घर से दुकान का रास्ता,
इतना प्यारा लगता था, कि बस चलता ही जाए।
बस खाने के ढाबे हों और कोई दुकान न आए।
.

अब तो ये बातें केवल स्मृतियों में आती हैं।
याद करते हैं उन्हें जब 'सैलून' कोई जाते हैं।
दुगने पैसे देकर भी आधी खुशियाँ पाते हैं।
बचपन की बातें हैं....।
.

हर्षवर्धन
*बचपन की यादें* . बाल काटने वाले भैया की ऊँची कुर्सी पर, जब अपने छोटे-छोटे पैर नहीं आते थे, और धम्म से अपन सीट के भीतर धँस जाते थे। . तब कुर्सी के दो हत्थों के ऊपर, उसी नाप की लकड़ी वाली एक पुरानी पाट रखी जाती थी। जिस पर बैठ कर अपन को राजा-सी फ़ीलिंग आती थी। आस-पास की दुनिया के मुक़ाबले अपना क़द बढ़-सा जाता था। . लगता था जैसे अब हम सारे जग से ऊँचे हैं, और होंठ के ऊपर आए बाल लगते थे जैसे मूँछें हैं। . कितना कठिन वक़्त होता था, काटे नहीं कटता था, स्प्रे-मग के पानी की बारिश चौंका ही जाती थी। कान के पीछे चलती कैंची, गुदगुदी मचाती थी। . पापा की ऊँगली थामे घर से दुकान का रास्ता, इतना प्यारा लगता था, कि बस चलता ही जाए। बस खाने के ढाबे हों और कोई दुकान न आए। . अब तो ये बातें केवल स्मृतियों में आती हैं। याद करते हैं उन्हें जब 'सैलून' कोई जाते हैं। दुगने पैसे देकर भी आधी खुशियाँ पाते हैं। बचपन की बातें हैं....। . हर्षवर्धन
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एक शब्द, एक शख़्स | स्नेहिल शुक्ला
.

जो मेरी बंद आँखों में बचपन से मुट्ठी भर सपने डालती आयी है, वो बन्द मगर मज़बूत मुट्ठी किसकी है?
.

जो मेरे उलझे हुए बालों और ख़्यालों के जंजाल की क़ैद से मुझे छुड़ाते आये हैं, वो दो हाथ किसके हैं?
.

जो मेरी रातों की नींद और सुबह का सबब बनी है, वो एक मीठी सी, भोली सी, चाशनी में डूबी हुई आवाज़ किसकी है?
.

जो मेरे हिम्मत हार जाने पर मुझे गोद में लेकर कैसे भी मौसम, कैसे भी हालात में मीलों का सफ़र तय करने को भी तैयार हो जाते हैं, वो दो क़दम किसके हैं?
.

जिन धड़कनों के धड़कने से मेरा दिल भी आज धड़कना जानता है, जिसके बड़े दिल जैसा ही बड़ा इंसान बनने को हर वक़्त मेरा जी चाहता है, वो दिल किसका है?
.

जिसकी छाया सी भी मैं बन जाऊँ तो मेरा जीवन सफ़ल हो जाए, वो छाया किसकी है?
.

जिसका अंश-मात्र भी पाकर मैं समुद्र की गहराई को पा जाऊँ, वो अंश आख़िर किसका है?
.

जिसे पाकर भी मैं हर वक़्त उसके साथ के सुख से अंजान रहती हूँ, जिसके होने से शायद मेरी ज़िंदगी है और जिसके ना होने पर शायद सब कुछ ख़त्म हो जाए, मेरे लिए इस दुनिया का मतलब ख़त्म हो जाए, उस इंसान के लिए डिक्शनरी में वो शब्द निर्धारित है जिस एक शब्द के बिना हर भाषा की डिक्शनरी अधूरी रह जाए, और आप, मैं, हम सब उस एक शब्द का दिन भर में ना जाने कितनी बार बिना उसकी गहराई समझे उच्चारण करते रहते हैं।
और वो एक शब्द है,
. "माँ",
.

और वो एक शख़्स जो मेरे हर सवाल का जवाब है वो है,
. "माँ"।
एक शब्द, एक शख़्स | स्नेहिल शुक्ला . जो मेरी बंद आँखों में बचपन से मुट्ठी भर सपने डालती आयी है, वो बन्द मगर मज़बूत मुट्ठी किसकी है? . जो मेरे उलझे हुए बालों और ख़्यालों के जंजाल की क़ैद से मुझे छुड़ाते आये हैं, वो दो हाथ किसके हैं? . जो मेरी रातों की नींद और सुबह का सबब बनी है, वो एक मीठी सी, भोली सी, चाशनी में डूबी हुई आवाज़ किसकी है? . जो मेरे हिम्मत हार जाने पर मुझे गोद में लेकर कैसे भी मौसम, कैसे भी हालात में मीलों का सफ़र तय करने को भी तैयार हो जाते हैं, वो दो क़दम किसके हैं? . जिन धड़कनों के धड़कने से मेरा दिल भी आज धड़कना जानता है, जिसके बड़े दिल जैसा ही बड़ा इंसान बनने को हर वक़्त मेरा जी चाहता है, वो दिल किसका है? . जिसकी छाया सी भी मैं बन जाऊँ तो मेरा जीवन सफ़ल हो जाए, वो छाया किसकी है? . जिसका अंश-मात्र भी पाकर मैं समुद्र की गहराई को पा जाऊँ, वो अंश आख़िर किसका है? . जिसे पाकर भी मैं हर वक़्त उसके साथ के सुख से अंजान रहती हूँ, जिसके होने से शायद मेरी ज़िंदगी है और जिसके ना होने पर शायद सब कुछ ख़त्म हो जाए, मेरे लिए इस दुनिया का मतलब ख़त्म हो जाए, उस इंसान के लिए डिक्शनरी में वो शब्द निर्धारित है जिस एक शब्द के बिना हर भाषा की डिक्शनरी अधूरी रह जाए, और आप, मैं, हम सब उस एक शब्द का दिन भर में ना जाने कितनी बार बिना उसकी गहराई समझे उच्चारण करते रहते हैं। और वो एक शब्द है, . "माँ", . और वो एक शख़्स जो मेरे हर सवाल का जवाब है वो है, . "माँ"।
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-हमेशा तो ऐसा होता भी नहीं ना कि इंतज़ार ख़त्म हो।
-लेकिन मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाता अगर आप कुछ कर रहे हो तो।
-लेकिन जो अंजाम तक ना पहुँच पाए ऐसे आग़ाज़ का क्या करेंगे हम।
-भले हर आग़ाज़ का अंजाम ना हो लेकिन हर अंजाम के लिए आग़ाज़ तो होता है। तुम अगर ये सोच लोगे कि अंजाम तक पहुँच नहीं पाओगे तो शुरुआत क्यूँ करना, फिर तो कोई उम्मीद भी नहीं कि कभी अंजाम तक पहुँचा जा सकेगा। बहुत से पल ऐसे आते हैं जब हम जीवन में जीत नहीं पाते हैं। लेकिन उस क्षोभ के साथ जीना कि हमने शुरुआत नहीं की, प्रयास नहीं किया, करता तो शायद हो भी सकता था, ये कहीं ज़्यादा मुश्किल होता है बशर्ते प्रयास करके हार जाने से या फिर अंजाम तक ना पहुँच पाने से।
-क्या तुम कभी ऐसी परिस्थिति में पड़ी हो? जहाँ तुम्हें लगा कि यहाँ हिम्मत से काम लेना पड़ेगा।
-मैंने तो सदियाँ जी है। मुसीबतों को भी देखा है, लेकिन तुम देख सकते हो मेरा बेहतर कल का सपना अभी भी जीवित है, और मुझे कभी नहीं लगता कि मैं विफल होऊँगी। अच्छा एक बात बताओ, तुमने अपनी परछाईं देखी है कभी?
-अब भला अपनी परछाईं कौन नहीं देखता?
-तो परछाईं को देख के तुम्हारे मन में क्या ख़याल आता है?
-वो तो रोशिनी की वजह से बनती है।
-बस इतना हीं सोच पाए तुम? क्या हमारी परछाईं हमारे होने का एहसास नहीं करवाती? हमारे अस्तित्व के होने का?
-उम्म...। शायद वह भी करवाती हैं।
-बस यूँ हीं समझ लो प्रयास हमें यह एहसास करवाती हैं कि हम जीवित हैं। हमें जीने के लिए ज़िंदगी जो मिली है उसका एक मक़सद भी है। वरना क्या रखा है जीने में या फिर मौत की गोद में चैन से सो जाने में।
- (भास्कर विश्वनाथन)
#storyoftheday #story #kahani @atrangeere #storyteller #storytelling #picturestories #hindi #hindistories #writers #writerscommunity #instawriters  #hindiliterature #literature #hindistan #shadow #life #bhopal #memories #work #travel #philosophy #bhaskervishwanathan #atrangeere #mumbai #hindiwriters
-हमेशा तो ऐसा होता भी नहीं ना कि इंतज़ार ख़त्म हो। -लेकिन मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाता अगर आप कुछ कर रहे हो तो। -लेकिन जो अंजाम तक ना पहुँच पाए ऐसे आग़ाज़ का क्या करेंगे हम। -भले हर आग़ाज़ का अंजाम ना हो लेकिन हर अंजाम के लिए आग़ाज़ तो होता है। तुम अगर ये सोच लोगे कि अंजाम तक पहुँच नहीं पाओगे तो शुरुआत क्यूँ करना, फिर तो कोई उम्मीद भी नहीं कि कभी अंजाम तक पहुँचा जा सकेगा। बहुत से पल ऐसे आते हैं जब हम जीवन में जीत नहीं पाते हैं। लेकिन उस क्षोभ के साथ जीना कि हमने शुरुआत नहीं की, प्रयास नहीं किया, करता तो शायद हो भी सकता था, ये कहीं ज़्यादा मुश्किल होता है बशर्ते प्रयास करके हार जाने से या फिर अंजाम तक ना पहुँच पाने से। -क्या तुम कभी ऐसी परिस्थिति में पड़ी हो? जहाँ तुम्हें लगा कि यहाँ हिम्मत से काम लेना पड़ेगा। -मैंने तो सदियाँ जी है। मुसीबतों को भी देखा है, लेकिन तुम देख सकते हो मेरा बेहतर कल का सपना अभी भी जीवित है, और मुझे कभी नहीं लगता कि मैं विफल होऊँगी। अच्छा एक बात बताओ, तुमने अपनी परछाईं देखी है कभी? -अब भला अपनी परछाईं कौन नहीं देखता? -तो परछाईं को देख के तुम्हारे मन में क्या ख़याल आता है? -वो तो रोशिनी की वजह से बनती है। -बस इतना हीं सोच पाए तुम? क्या हमारी परछाईं हमारे होने का एहसास नहीं करवाती? हमारे अस्तित्व के होने का? -उम्म...। शायद वह भी करवाती हैं। -बस यूँ हीं समझ लो प्रयास हमें यह एहसास करवाती हैं कि हम जीवित हैं। हमें जीने के लिए ज़िंदगी जो मिली है उसका एक मक़सद भी है। वरना क्या रखा है जीने में या फिर मौत की गोद में चैन से सो जाने में। - (भास्कर विश्वनाथन) #storyoftheday  #story  #kahani  @atrangeere #storyteller  #storytelling  #picturestories  #hindi  #hindistories  #writers  #writerscommunity  #instawriters  #hindiliterature  #literature  #hindistan  #shadow  #life  #bhopal  #memories  #work  #travel  #philosophy  #bhaskervishwanathan  #atrangeere  #mumbai  #hindiwriters 
कुछ भी नहीं ,बहुतै आसान हैं,
एक बड़ी सी नाव में हम और आप साथ बैठ कर ,कविताएँ सुनेंगे और सुनाएंगे
गंगा मैया की सवारी करना अपने आप में सुकून का दूसरा चेहरा है और उसपर आपकी रचनाएँ मतलब कि सुकून के साथ ही खुशियों से लिपटी रूह।

आसान तो हैं, पर उसके लिए आपको जल्द से जल्द फॉर्म भरना होगा। हमारी मंडली 20 सुखनवरों का चयन करेगी जो हमारी इस ख़ास बैठक का हिस्सा होंगे। Go and register now
Link In Bio❤️
कुछ भी नहीं ,बहुतै आसान हैं, एक बड़ी सी नाव में हम और आप साथ बैठ कर ,कविताएँ सुनेंगे और सुनाएंगे गंगा मैया की सवारी करना अपने आप में सुकून का दूसरा चेहरा है और उसपर आपकी रचनाएँ मतलब कि सुकून के साथ ही खुशियों से लिपटी रूह। आसान तो हैं, पर उसके लिए आपको जल्द से जल्द फॉर्म भरना होगा। हमारी मंडली 20 सुखनवरों का चयन करेगी जो हमारी इस ख़ास बैठक का हिस्सा होंगे। Go and register now Link In Bio❤️
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वो | हीना गनोत्रा
.

वो एक पहेली की तरह उलझा हुआ,
उस पहेली के सुलझे हुए जवाब सी वो।
.

वो दुष्ट सी कोई भयानक रात,
उस रात का सुन्दर सपना सी वो।
.

वो बंजर सा एक प्यासा शरीर,
उस शरीर में उगती हुई उम्मीद सी वो।
.

वो जंजीरों में जकड़ा हुआ सा एक शहर
उस शहर में आज़ाद पंछियों सी वो।
.

वो आवारा, बेलिहाज़, बेअदब सा दिल,
उस दिल में अदब की मूरत सी वो।
.

वो गुमशुदा सा एक मकाम,
उस मकाम तक का रस्ता सी वो।
.

वो रात सा, अँधेरों में लिपटा हुआ कमरा,
उस कमरे में टिमटिमाते जुगनू सी वो।
.

वो नफरतों से सजा एक वीरान सा घर,
उस घर में पहली मोहब्बत की दस्तक सी वो।
वो | हीना गनोत्रा . वो एक पहेली की तरह उलझा हुआ, उस पहेली के सुलझे हुए जवाब सी वो। . वो दुष्ट सी कोई भयानक रात, उस रात का सुन्दर सपना सी वो। . वो बंजर सा एक प्यासा शरीर, उस शरीर में उगती हुई उम्मीद सी वो। . वो जंजीरों में जकड़ा हुआ सा एक शहर उस शहर में आज़ाद पंछियों सी वो। . वो आवारा, बेलिहाज़, बेअदब सा दिल, उस दिल में अदब की मूरत सी वो। . वो गुमशुदा सा एक मकाम, उस मकाम तक का रस्ता सी वो। . वो रात सा, अँधेरों में लिपटा हुआ कमरा, उस कमरे में टिमटिमाते जुगनू सी वो। . वो नफरतों से सजा एक वीरान सा घर, उस घर में पहली मोहब्बत की दस्तक सी वो।
“अंधाधुन” नाम सुनके हीं लगता है कि किसी अंधे की कहानी होगी और संगीत भी होगा। लेकिन, ऐसे नाम सिनमा में आम नहीं हैं। तो हमें अजीब सी लगती है। ऐसे ही अजीब निर्देशक हैं श्रीराम राघवन। उनकी फ़िल्में दर्शकों के ऊपर सवाल छोड़ के जाती हैं, बजाए जवाब देने के। अंधाधुन का संगीत बहुत कमाल का है। शायद बहुत दिनो के बाद मुझे इतना कर्णप्रिय संगीत सुनने को मिला। अमित त्रिवेदी का शुक्रिया। छायांकन बेहतरीन है। के. मोहनन ने फ़िल्म के हर फ़्रेम को बेहतरीन तरीक़े से छायांकित किया है। आयुष्मान खुराना मुझे कुछ अलग हीं दिखे। उन्हें परदे पर देखते हुए मुझे लगभग पूरी फ़िल्म में हीं यही लगा कि शायद ये अभिनेता उन जैसा दिखने वाला कोई और हीं है। अगर फ़िल्म में उनका नाम नहीं आता तो मैं शायद आसानी से विश्वास कर लेता कि वो आयुष्मान नहीं हैं। राधिका आप्टे को एक बार फिर से इतनी बड़ी कहानी में छोटा-सा हिस्सा देके ठगने की कोशिश की गयी। वैसे निर्देशक उनके साथ बदलापुर में भी ऐसा कर चुके हैं। तबू के किरदार में बहुत दम था उतनी हीं आसानी से उन्होंने निभाया भी। बाक़ी कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदार  साथ न्याय किया है।
अब आते हैं फ़िल्म की कथा और पटकथा पे। फ़िल्म के लेखकों की लिस्ट लम्बी है, कहानी की तरह हीं। शुरुआत के दृश्य से हीं कहानी दर्शकों के ऊपर पूरी पकड़ बना के रखती है। और हमें लगता रहता है सब बहुत अच्छा है। लेकिन, आधी कहानी के बाद चीज़ें इतनी बिखर जाती हैं कि हर छोर को समेट पाना मुश्किल हो जाता है। पहले भी कितनी फ़िल्में बन चुकी हैं जिसमें अंत दर्शकों पर छोड़ दिया जाता है। लेकिन, यहाँ तो वह भी नहीं हुआ। एक अंत दर्शकों को दिखाया गया, दूसरा अंत समझने के लिए छोड़ा गया। दर्शक कौन से छोर को पकड़ के रखेंगे ये उनकी ज़िम्मेदारी है। ऐसा नहीं है कि ऐसी फ़िल्में मुझे पसंद नहीं हैं, लेकिन मुझे घर लौटते हुए पता नहीं क्यूँ ख़ाली हाथ लौटने जैसा महसूस हो रहा था। ऐसी फ़िल्मों में आपको दिमाग़ इतना लगाना पड़ता है कि हाथ में कुछ नहीं रहता। अगर कोई दिमाग़ लगाने में यक़ीन नहीं करता तो उसके लिए ये ग़लत जगह हो सकती है।
फ़िल्म के बेहतरीन पलों में मुझे अभी भी उसके गाने याद आते हैं और पियानो का वह मधुर संगीत। वैसे मैं बस संगीत सुनने भर भी दोबारा थियेटर जा सकता हूँ।
#bhaskervishwanathan #film #filmreview #andhadhun #movie #shriramraghavan #amittrivedi #music #ayushmankhurrana #tabu #hindiliterature #hindi #storyoftheday #atrangeere #blog #filmblog #pvr #mumbai #bollywood #radhikaapte #hindistan
“अंधाधुन” नाम सुनके हीं लगता है कि किसी अंधे की कहानी होगी और संगीत भी होगा। लेकिन, ऐसे नाम सिनमा में आम नहीं हैं। तो हमें अजीब सी लगती है। ऐसे ही अजीब निर्देशक हैं श्रीराम राघवन। उनकी फ़िल्में दर्शकों के ऊपर सवाल छोड़ के जाती हैं, बजाए जवाब देने के। अंधाधुन का संगीत बहुत कमाल का है। शायद बहुत दिनो के बाद मुझे इतना कर्णप्रिय संगीत सुनने को मिला। अमित त्रिवेदी का शुक्रिया। छायांकन बेहतरीन है। के. मोहनन ने फ़िल्म के हर फ़्रेम को बेहतरीन तरीक़े से छायांकित किया है। आयुष्मान खुराना मुझे कुछ अलग हीं दिखे। उन्हें परदे पर देखते हुए मुझे लगभग पूरी फ़िल्म में हीं यही लगा कि शायद ये अभिनेता उन जैसा दिखने वाला कोई और हीं है। अगर फ़िल्म में उनका नाम नहीं आता तो मैं शायद आसानी से विश्वास कर लेता कि वो आयुष्मान नहीं हैं। राधिका आप्टे को एक बार फिर से इतनी बड़ी कहानी में छोटा-सा हिस्सा देके ठगने की कोशिश की गयी। वैसे निर्देशक उनके साथ बदलापुर में भी ऐसा कर चुके हैं। तबू के किरदार में बहुत दम था उतनी हीं आसानी से उन्होंने निभाया भी। बाक़ी कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदार साथ न्याय किया है। अब आते हैं फ़िल्म की कथा और पटकथा पे। फ़िल्म के लेखकों की लिस्ट लम्बी है, कहानी की तरह हीं। शुरुआत के दृश्य से हीं कहानी दर्शकों के ऊपर पूरी पकड़ बना के रखती है। और हमें लगता रहता है सब बहुत अच्छा है। लेकिन, आधी कहानी के बाद चीज़ें इतनी बिखर जाती हैं कि हर छोर को समेट पाना मुश्किल हो जाता है। पहले भी कितनी फ़िल्में बन चुकी हैं जिसमें अंत दर्शकों पर छोड़ दिया जाता है। लेकिन, यहाँ तो वह भी नहीं हुआ। एक अंत दर्शकों को दिखाया गया, दूसरा अंत समझने के लिए छोड़ा गया। दर्शक कौन से छोर को पकड़ के रखेंगे ये उनकी ज़िम्मेदारी है। ऐसा नहीं है कि ऐसी फ़िल्में मुझे पसंद नहीं हैं, लेकिन मुझे घर लौटते हुए पता नहीं क्यूँ ख़ाली हाथ लौटने जैसा महसूस हो रहा था। ऐसी फ़िल्मों में आपको दिमाग़ इतना लगाना पड़ता है कि हाथ में कुछ नहीं रहता। अगर कोई दिमाग़ लगाने में यक़ीन नहीं करता तो उसके लिए ये ग़लत जगह हो सकती है। फ़िल्म के बेहतरीन पलों में मुझे अभी भी उसके गाने याद आते हैं और पियानो का वह मधुर संगीत। वैसे मैं बस संगीत सुनने भर भी दोबारा थियेटर जा सकता हूँ। #bhaskervishwanathan  #film  #filmreview  #andhadhun  #movie  #shriramraghavan  #amittrivedi  #music  #ayushmankhurrana  #tabu  #hindiliterature  #hindi  #storyoftheday  #atrangeere  #blog  #filmblog  #pvr  #mumbai  #bollywood  #radhikaapte  #hindistan 
After completion of #thriller #novel #TheCoin it's time for a #Hindi #literature 
#BanarasTalkies arrived in #HDLibrary 
From a contemporary #writer @satyavyas11 Sir.
It's always pleasure to #read #HindiNovel #HindiLiterature
Thanks a lot to #HindYugm #hindyugmprakashan 
Always on time delivery by @amazondotin ♡
#ilovebooks #ilovereading #readmore #learnmore #livemore ♡♡♡
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ख़ुदा तेरी अदालत में, चलेगा मुक्कदमा एक बार
ख्वाइशें करेंगी याचिका, कटघरे में खड़े होंगे हालात 
सत्य असत्य की लड़ाई में, पेश किए जाएंगे सबूत
उम्मीद की लौ सजाई है, उसे बचाने जूझ रहे सपूत

लगेंगे इल्ज़ाम ज़रूरतों पर, पुरे नहीं हुए कुछ सपने
रोयेंगी ज़रूरतें तेरे दरबार में, "सपनो के खातिर गवाए है कुछ अपने" भूख की चीखें सवाल करेंगी, ख़्वाबों से उनके जवाब मांगेगी
हुआ था जिनकी वजह से दुराचार, एक बार तो करीए अपना विचार

बोझ जिम्मेदारियों का गर बढ़ गया था, तो करते कुछ देर विश्राम
किसी की लाचारी का आधार बनाकर, नहीं देते रिश्तों को आराम

सुनी सबकी बातें ख़ुदा ने, सुना सब का अभिप्राय
"लोभ मोह क्रोध से जो मुक्त हो जाय, इंसान एसा ख़ुदा को पाय"

सफर ए ज़िन्दगी में कई उतार चढ़ाव होंगे 'पथिक'
हिम्मत, साहस और कृतज्ञ से रहना तू सटीक

पथिक

#yqbaba #yqhindi #yqdidi #hindi #life 
#urdulovers #shayara #mushaira #hindistan #hindiliterature #shayrilover #life
ख़ुदा तेरी अदालत में, चलेगा मुक्कदमा एक बार ख्वाइशें करेंगी याचिका, कटघरे में खड़े होंगे हालात सत्य असत्य की लड़ाई में, पेश किए जाएंगे सबूत उम्मीद की लौ सजाई है, उसे बचाने जूझ रहे सपूत लगेंगे इल्ज़ाम ज़रूरतों पर, पुरे नहीं हुए कुछ सपने रोयेंगी ज़रूरतें तेरे दरबार में, "सपनो के खातिर गवाए है कुछ अपने" भूख की चीखें सवाल करेंगी, ख़्वाबों से उनके जवाब मांगेगी हुआ था जिनकी वजह से दुराचार, एक बार तो करीए अपना विचार बोझ जिम्मेदारियों का गर बढ़ गया था, तो करते कुछ देर विश्राम किसी की लाचारी का आधार बनाकर, नहीं देते रिश्तों को आराम सुनी सबकी बातें ख़ुदा ने, सुना सब का अभिप्राय "लोभ मोह क्रोध से जो मुक्त हो जाय, इंसान एसा ख़ुदा को पाय" सफर ए ज़िन्दगी में कई उतार चढ़ाव होंगे 'पथिक' हिम्मत, साहस और कृतज्ञ से रहना तू सटीक पथिक #yqbaba  #yqhindi  #yqdidi  #hindi  #life  #urdulovers  #shayara  #mushaira  #hindistan  #hindiliterature  #shayrilover  #life 
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’
TMP परिवार की तरफ से 
नवरात्रि की शुभकामनाएं
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ TMP परिवार की तरफ से नवरात्रि की शुभकामनाएं
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नज़्म: आँधी

एक आँधी जो आई थी
बिखेर गई थी सफ़हे सारे
सफहों का जत्था बना गई
कमरे के एक कोने में
जहाँ अंधेरा ठिठुर रहा था
ज़ुर्म की गर्म हवा से

अब दूसरी सम्त से
एक हवा चली है
पन्ने उछल रहे है
सियाही बोल रही है
धीरे धीरे उजाला हो रहा है
रौशनी आँखें खोल रही है

अब दूसरी सम्त से
हवाओं ने करवट बदली है
एक आँधी का जन्म हुआ है
पन्ने होंसलों से उड़ने लगे है
डर ,हर्फ़ों का ख़त्म हुआ है

अब ये आँधी जो आई है
चेहरे के नक़ाब को छाटेगी
अब ये आँधी जो आई है
उस आँधी को ये काटेगी

ये आँधी जो आई है
इसने समेट ली है खामोशियाँ
आवाज़ बना कर ले गई है
सरगोशियों को, उस आँधी के पास
और माँगा है जवाब
उन सभी सवालों का
जिनका गला दबाया गया था
कमरे के उस कोने में
जहाँ अंधेरा ठिठुर रहा था
ज़ुर्म की गर्म हवा से ©Anshul Joshi
नज़्म: आँधी एक आँधी जो आई थी बिखेर गई थी सफ़हे सारे सफहों का जत्था बना गई कमरे के एक कोने में जहाँ अंधेरा ठिठुर रहा था ज़ुर्म की गर्म हवा से अब दूसरी सम्त से एक हवा चली है पन्ने उछल रहे है सियाही बोल रही है धीरे धीरे उजाला हो रहा है रौशनी आँखें खोल रही है अब दूसरी सम्त से हवाओं ने करवट बदली है एक आँधी का जन्म हुआ है पन्ने होंसलों से उड़ने लगे है डर ,हर्फ़ों का ख़त्म हुआ है अब ये आँधी जो आई है चेहरे के नक़ाब को छाटेगी अब ये आँधी जो आई है उस आँधी को ये काटेगी ये आँधी जो आई है इसने समेट ली है खामोशियाँ आवाज़ बना कर ले गई है सरगोशियों को, उस आँधी के पास और माँगा है जवाब उन सभी सवालों का जिनका गला दबाया गया था कमरे के उस कोने में जहाँ अंधेरा ठिठुर रहा था ज़ुर्म की गर्म हवा से ©Anshul Joshi
-रोबोट भी वैसे कम से कम जो उसमें भरा जाता है वही करता और बोलता है। लेकिन इंसान को तो अक्सर ख़ुद हीं पता नहीं होता कि वह बोलता और करता क्या है।
-सोचो यह सब होने के बाद भी आज तक इंसानियत ज़िंदा है। ठीक उसी तरह जैसे काले घने अंधेरे में जुगनू चमकते रहते हैं बिना यह सोचे कि वह अंधेरे को कितना दूर कर पाएँगे या फिर उनकी रोशिनी किसी के कितने काम आ पाएगी। -हम्म...। या फिर ये लैम्प जो मधम रोशिनी से चमक रहा है। ये भी तो ठीक वही कर रहा।
-उम्म...। कर तो वही रहा। लेकिन एक जुगनू और एक लैम्प में फ़र्क़ ये है कि जुगनू जीवित होते हैं, जलना उनकी फ़ितरत है। लैम्प भी वही करता है उसी के लिए बना है, लेकिन लैम्प इन्सानों के निर्देश या इच्छा से चलता है। इसलिए कम रोशिनी देते हुए भी जुगनू ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
-मतलब, तुम कहना चाहती हो कि इंसान की उम्मीद है वह जुगनू।
-बिलकुल उम्मीद है। जुगनू इस बात का प्रतीक है। झूठ या अँधेरा कितना भी घना हो, सच की मधम रोशिनी को भी दबा के रखने की ताक़त उसमें नहीं है। हो सकता है देर हो लेकिन वह सामने आएगी बस समय का इंतज़ार करो।
- (भास्कर विश्वनाथन)
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-रोबोट भी वैसे कम से कम जो उसमें भरा जाता है वही करता और बोलता है। लेकिन इंसान को तो अक्सर ख़ुद हीं पता नहीं होता कि वह बोलता और करता क्या है। -सोचो यह सब होने के बाद भी आज तक इंसानियत ज़िंदा है। ठीक उसी तरह जैसे काले घने अंधेरे में जुगनू चमकते रहते हैं बिना यह सोचे कि वह अंधेरे को कितना दूर कर पाएँगे या फिर उनकी रोशिनी किसी के कितने काम आ पाएगी। -हम्म...। या फिर ये लैम्प जो मधम रोशिनी से चमक रहा है। ये भी तो ठीक वही कर रहा। -उम्म...। कर तो वही रहा। लेकिन एक जुगनू और एक लैम्प में फ़र्क़ ये है कि जुगनू जीवित होते हैं, जलना उनकी फ़ितरत है। लैम्प भी वही करता है उसी के लिए बना है, लेकिन लैम्प इन्सानों के निर्देश या इच्छा से चलता है। इसलिए कम रोशिनी देते हुए भी जुगनू ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं। -मतलब, तुम कहना चाहती हो कि इंसान की उम्मीद है वह जुगनू। -बिलकुल उम्मीद है। जुगनू इस बात का प्रतीक है। झूठ या अँधेरा कितना भी घना हो, सच की मधम रोशिनी को भी दबा के रखने की ताक़त उसमें नहीं है। हो सकता है देर हो लेकिन वह सामने आएगी बस समय का इंतज़ार करो। - (भास्कर विश्वनाथन) #bhaskervishwanathan  #storyoftheday  #kahani  #story  @atrangeere #hindi  #hindistory  #hindiwriters  #hindiwritings  #hindistan  #hope  #life  #quotes  #humanity  #lifestories  #lifelessons  #hindiliterature  #literature  #artist  #instaartist  #atrangeere  #writer  #instastories  #mumbai  #northantadka  #restaurant  #bar 
"कलम हमारी" कौन सुने अब व्यथा हमारी, आज अकेली कलम हमारी,
जो थी कभी पहचान हमारी, आज अकेली कलम हमारी। हाथों के स्पर्श मात्र से, पढ़ लेती थी हृदय की बातें,
काग़ज़ के कोरे पन्नों को, बतलाती थी मेरी यादें। कभी साथ जो देती थी, तम में, ग़म में, शरद शीत में,
आज वही अनजान खड़ी है, इंतजार की मधुर प्रीत में। अभी शांत हूँ, व्याकुल भी हूँ, श्वेत धूम्र के बीच भँवर में,
ढूँढ रहा हूँ एक ठिकाना, ग्रीष्म पवन के बीच अधर में, किन्तु प्रिये तुम व्याकुल मत होना, क्षण भर भी धीरज मत खोना,
अभी भरोसा मुझे है ख़ुद पर, आऊँगा एक नए रूप में, भरने तेरे उर का कोना। © शिवांश मिश्र
"कलम हमारी" कौन सुने अब व्यथा हमारी, आज अकेली कलम हमारी, जो थी कभी पहचान हमारी, आज अकेली कलम हमारी। हाथों के स्पर्श मात्र से, पढ़ लेती थी हृदय की बातें, काग़ज़ के कोरे पन्नों को, बतलाती थी मेरी यादें। कभी साथ जो देती थी, तम में, ग़म में, शरद शीत में, आज वही अनजान खड़ी है, इंतजार की मधुर प्रीत में। अभी शांत हूँ, व्याकुल भी हूँ, श्वेत धूम्र के बीच भँवर में, ढूँढ रहा हूँ एक ठिकाना, ग्रीष्म पवन के बीच अधर में, किन्तु प्रिये तुम व्याकुल मत होना, क्षण भर भी धीरज मत खोना, अभी भरोसा मुझे है ख़ुद पर, आऊँगा एक नए रूप में, भरने तेरे उर का कोना। © शिवांश मिश्र
"बहुत कुछ है"
@jazbaat_ki_kalam_se .
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*तुम*
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कभी कोई पुराना गाना सुना है? कैसे सारे भूले बिसरे लफ्ज़ जुबां पर अपने आप चले आते हैं ना| बस, वो अपनापन हो तुम|
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रात में खुली-खाली सड़क पर आप red-light पर रुको, और आपको देख कर 2 लोग और रुकें, तो अच्छा लगता है ना| बस, वो गर्व हो तुम|
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ठंड में अचानक आप बाहर जाओ, और गुनगुनाती धुप आपका स्वागत करे| बस, वो मिठास हो तुम|
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कोई बच्चा, अंजाना ही सही, बिना रोये अपनी माँ की गोद से तुम्हारे पास आने के लिए हाथ फैला दे, हुआ है कभी? बस, वो मासूम सा गुरुर हो तुम|
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शादी में कभी दूल्हे के पिता, या दुल्हन की माँ को देखना, चुप चाप कोने में खड़े| बस, वो शुक्राना हो तुम|
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नहीं समझे? दिल से निकला हर सच्चा भाव हो तुम, विश्वास हो तुम, प्यार हो तुम|
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नंदिनी राघव कपूर
*तुम* . कभी कोई पुराना गाना सुना है? कैसे सारे भूले बिसरे लफ्ज़ जुबां पर अपने आप चले आते हैं ना| बस, वो अपनापन हो तुम| . रात में खुली-खाली सड़क पर आप red-light पर रुको, और आपको देख कर 2 लोग और रुकें, तो अच्छा लगता है ना| बस, वो गर्व हो तुम| . ठंड में अचानक आप बाहर जाओ, और गुनगुनाती धुप आपका स्वागत करे| बस, वो मिठास हो तुम| . कोई बच्चा, अंजाना ही सही, बिना रोये अपनी माँ की गोद से तुम्हारे पास आने के लिए हाथ फैला दे, हुआ है कभी? बस, वो मासूम सा गुरुर हो तुम| . शादी में कभी दूल्हे के पिता, या दुल्हन की माँ को देखना, चुप चाप कोने में खड़े| बस, वो शुक्राना हो तुम| . नहीं समझे? दिल से निकला हर सच्चा भाव हो तुम, विश्वास हो तुम, प्यार हो तुम| . नंदिनी राघव कपूर
*सुक़ून की तलाश*
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ढल गई है ख़्वाहिशें
अब बस सुकून तलाशते हैं,
छिप गया है जो मन के अँधेरों में,
वो जुनून तलाशते हैं।
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नामुमकिन से कुछ ख़्वाब थे
उलझे हुए थे सपनों में,
आज भी दिल के एक कोने में उन्हें तराशते हैं,
और दबी हुई-सी उस ज़िद,
उस ज़िंदादिली को तलाशते हैं।
.

मुस्कुराती हैं उलझनें,
ढलती हुई ख़्वाहिशों को देख कर,
हम ख़ुद में ख़ुद को अब कुछ यूँ तलाशते हैं,
कि अब बस सुक़ून तलाशते हैं।
. ~ अदिती
*सुक़ून की तलाश* . ढल गई है ख़्वाहिशें अब बस सुकून तलाशते हैं, छिप गया है जो मन के अँधेरों में, वो जुनून तलाशते हैं। . नामुमकिन से कुछ ख़्वाब थे उलझे हुए थे सपनों में, आज भी दिल के एक कोने में उन्हें तराशते हैं, और दबी हुई-सी उस ज़िद, उस ज़िंदादिली को तलाशते हैं। . मुस्कुराती हैं उलझनें, ढलती हुई ख़्वाहिशों को देख कर, हम ख़ुद में ख़ुद को अब कुछ यूँ तलाशते हैं, कि अब बस सुक़ून तलाशते हैं। . ~ अदिती
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Remembering premchand on his 82nd death anniversary. My mother introduced me to this author. Her descriptions of his stories in its own way was magic - she made me look at the beauty of the mango trees and village living. 4 books later I was a fan and feel sorry that he didn’t get to witness the love 💖 in his lifetime.#premchand #hindiliterature
Remembering premchand on his 82nd death anniversary. My mother introduced me to this author. Her descriptions of his stories in its own way was magic - she made me look at the beauty of the mango trees and village living. 4 books later I was a fan and feel sorry that he didn’t get to witness the love 💖 in his lifetime.#premchand  #hindiliterature 
बिलकुल, जीने का एहसास और क्या होता है। बस यही तो होता है, जब बारह हाथ एक साथ कुछ बनाने में आपके किचन में लग जाते हैं, तो हर धुँधली तस्वीर बिलकुल साफ़ हो जाती है।
हाँ। तुम सही कह रहे हो। लेकिन, कभी-कभी कुछ तस्वीरों का धुँधला रहना हीं अच्छा होता है।
मतलब?
मतलब यही कि सामने अगर हर चीज़ या कहें हम साफ़ भविष्य देखने लग जाते हैं तो कहीं ना कहीं जीवन का स्वाद फीका पड़ जाता है।
कहीं तुम यह तो नहीं कहना चाहती कि, जीवन में आगे होने वाली चीज़ों को हमें पहले से जानने की जुर्रत नहीं करनी चाहिए। ऐसे करने से जीने का मज़ा किरकिरा हो जाता है।
बिलकुल, यही तो कह रही मैं। जब हम पैदा होते हैं, हमें कुछ नहीं पता होता है कि हम इस दुनिया में आए क्यूँ है, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें एक मक़सद मिलना शुरू होता है। फिर एक के बाद एक मुश्किलें आती-जाती रहती है। लेकिन वह मुश्किलें हीं तो होती हैं जिनसे जूझते हुए हम आगे का मार्ग प्रशस्त करते हैं। अगर हम प्रयास ना करें और पहले हीं जान जाएँ कि बिना प्रयास के सब ठीक हो जाएगा तो हो जाएगी ना ज़िंदगी बेस्वाद।
हाँ! समझ गया मैं। बिलकुल, किसी अस्वाद फल के जैसा जो हमारी झोली में कितना भी पड़ा हो लेकिन उन्हें खाने में हमारा तनिक भी इंट्रेस्ट नहीं होता।
हाँ! तो कुछ तस्वीरों को धुँधली हीं रहने दो। और कोशिश करो दूर बैठ के उनके अंदर छिपी बातों को जानने की।
- (भास्कर विश्वनाथन)
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बिलकुल, जीने का एहसास और क्या होता है। बस यही तो होता है, जब बारह हाथ एक साथ कुछ बनाने में आपके किचन में लग जाते हैं, तो हर धुँधली तस्वीर बिलकुल साफ़ हो जाती है। हाँ। तुम सही कह रहे हो। लेकिन, कभी-कभी कुछ तस्वीरों का धुँधला रहना हीं अच्छा होता है। मतलब? मतलब यही कि सामने अगर हर चीज़ या कहें हम साफ़ भविष्य देखने लग जाते हैं तो कहीं ना कहीं जीवन का स्वाद फीका पड़ जाता है। कहीं तुम यह तो नहीं कहना चाहती कि, जीवन में आगे होने वाली चीज़ों को हमें पहले से जानने की जुर्रत नहीं करनी चाहिए। ऐसे करने से जीने का मज़ा किरकिरा हो जाता है। बिलकुल, यही तो कह रही मैं। जब हम पैदा होते हैं, हमें कुछ नहीं पता होता है कि हम इस दुनिया में आए क्यूँ है, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें एक मक़सद मिलना शुरू होता है। फिर एक के बाद एक मुश्किलें आती-जाती रहती है। लेकिन वह मुश्किलें हीं तो होती हैं जिनसे जूझते हुए हम आगे का मार्ग प्रशस्त करते हैं। अगर हम प्रयास ना करें और पहले हीं जान जाएँ कि बिना प्रयास के सब ठीक हो जाएगा तो हो जाएगी ना ज़िंदगी बेस्वाद। हाँ! समझ गया मैं। बिलकुल, किसी अस्वाद फल के जैसा जो हमारी झोली में कितना भी पड़ा हो लेकिन उन्हें खाने में हमारा तनिक भी इंट्रेस्ट नहीं होता। हाँ! तो कुछ तस्वीरों को धुँधली हीं रहने दो। और कोशिश करो दूर बैठ के उनके अंदर छिपी बातों को जानने की। - (भास्कर विश्वनाथन) #storyoftheday  #kahani  #story  @atrangeere #hindi  #hindistory  #hindiwriters  #hindiwritings  #hindistan  #hindiliterature  #literature  #travelstory  #blurimage  #blur  #train  #travel  #blogger  #blog  #hindiblog  #dailyblog  #bhaskervishwanathan  #atrangeere  #mumbai  #delhi  #patna  #travelmode  #traveldiary  #friends  #family  #iphone 
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इलाहाबाद | स्नेहिल शुक्ला
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गंगा नदी के किनारे बसा शहर। महादेव की नगरी वाराणसी का पड़ोसी, संगम के तट का सदियों से प्रहरी, प्रयागराज इलाहाबाद। ख़ुदा के बंदों, इलाहियों का नगर, इलाहाबाद।
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सालों से भारत में विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना ये शहर, जहाँ चाय पर चर्चा नहीं बकैतबाज़ी चलती है, जहाँ दोस्तों, यारों, पड़ोसियों को अलग-अलग नाम से बुलाने का रिवाज़ नहीं है, जहाँ हर क़रीबी को बाबा कहकर बुलाते हैं, वो इलाहाबाद। कुम्भ का, अर्धकुंभ का, संगम का इलाहाबाद। मेरा, तुम्हारा, चन्द्रशेखर आज़ाद, हरिवंश राय बच्चन जी, महादेवी वर्मा जी और अमिताभ बच्चन जी का इलाहाबाद।
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कटरा पर नेतराम की स्वादिष्ट कचौड़ियों का इलाहाबाद, सिविल लाइन्स में हीरा हलवाई की मिठाईयों का इलाहाबाद, और वहीं पास में ही मैक डोनॉल्डस का, डोमिनोज़ का, पीवीआर का भी महँगा सा इलाहाबाद। ईट ऑन का माँसाहारी इलाहाबाद, शामियाना का शाकाहारी इलाहाबाद। स्टारवर्ल्ड पैलेस का सिनेमा का आशिक़ इलाहाबाद।
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धर्मवीर भारती की गुनाहों का देवता के सुधा और चन्दर का भोला सा इलाहाबाद। शादी में ज़रूर आना के क़िरदारों के प्यार का गवाह, इलाहाबाद। नेहरू का, इंदिरा का, गाँधी का राजनैतिक इलाहाबाद। और तो और, अल्फ़्रेड तक का फिरंगी सा इलाहाबाद।
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नारायणी आश्रम, भारद्वाज पार्क, चंद्रशेखर आज़ाद पार्क, आनंद भवन का इलाहाबाद। यहाँ पर दफ़न ख़ुसरो तक का इलाहाबाद। नैनी पुल पर हर रोज़ टूटते-जुड़ते हुए रिश्तों का इलाहाबाद। पिया मिलन चौराहे पर इश्क़ लड़ाने वालों का इलाहाबाद।
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एमएनएनआईटी, ट्रिपलआईटी, आईईआरटी में पढ़ने वालों का इलाहाबाद। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव का इलाहाबाद। शिएट्स का इलाहाबाद। यूनाईटेड, शम्भूनाथ, ईसीसी, बीबीएस का वन नाईट फाइट वाला इलाहाबाद। जेके इंस्टिट्यूट ऑफ फ़िज़िकल साइंसेज़ का इलाहाबाद। बीएचएस, जोसेफ़, मैरी कॉन्वेंट में पढ़े हुए, बढ़े हुओं का इलाहाबाद।
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हम सब इलाहाबाद के और हम सबका इलाहाबाद। बैंक रोड पर बैठे हम सभी दोस्तों की टोली का मासूम सा इलाहाबाद। कॉलेज कैंटीन में प्यार की पींगें बढ़ाते हुए आशिक़ों का इलाहाबाद। और कुछ सालों पहले यहाँ पर हम जो यहाँ आये थे और चंद दिनों में हम जो यहाँ से चले जाएँगे, हमारी उन खट्टी-मीठी-तीख़ी सी यादों का इलाहाबाद।
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घर से दूर एक घर, इलाहाबाद। परिवार के बाहर एक परिवार, इलाहाबाद।
इलाहाबाद | स्नेहिल शुक्ला . गंगा नदी के किनारे बसा शहर। महादेव की नगरी वाराणसी का पड़ोसी, संगम के तट का सदियों से प्रहरी, प्रयागराज इलाहाबाद। ख़ुदा के बंदों, इलाहियों का नगर, इलाहाबाद। . सालों से भारत में विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना ये शहर, जहाँ चाय पर चर्चा नहीं बकैतबाज़ी चलती है, जहाँ दोस्तों, यारों, पड़ोसियों को अलग-अलग नाम से बुलाने का रिवाज़ नहीं है, जहाँ हर क़रीबी को बाबा कहकर बुलाते हैं, वो इलाहाबाद। कुम्भ का, अर्धकुंभ का, संगम का इलाहाबाद। मेरा, तुम्हारा, चन्द्रशेखर आज़ाद, हरिवंश राय बच्चन जी, महादेवी वर्मा जी और अमिताभ बच्चन जी का इलाहाबाद। . कटरा पर नेतराम की स्वादिष्ट कचौड़ियों का इलाहाबाद, सिविल लाइन्स में हीरा हलवाई की मिठाईयों का इलाहाबाद, और वहीं पास में ही मैक डोनॉल्डस का, डोमिनोज़ का, पीवीआर का भी महँगा सा इलाहाबाद। ईट ऑन का माँसाहारी इलाहाबाद, शामियाना का शाकाहारी इलाहाबाद। स्टारवर्ल्ड पैलेस का सिनेमा का आशिक़ इलाहाबाद। . धर्मवीर भारती की गुनाहों का देवता के सुधा और चन्दर का भोला सा इलाहाबाद। शादी में ज़रूर आना के क़िरदारों के प्यार का गवाह, इलाहाबाद। नेहरू का, इंदिरा का, गाँधी का राजनैतिक इलाहाबाद। और तो और, अल्फ़्रेड तक का फिरंगी सा इलाहाबाद। . नारायणी आश्रम, भारद्वाज पार्क, चंद्रशेखर आज़ाद पार्क, आनंद भवन का इलाहाबाद। यहाँ पर दफ़न ख़ुसरो तक का इलाहाबाद। नैनी पुल पर हर रोज़ टूटते-जुड़ते हुए रिश्तों का इलाहाबाद। पिया मिलन चौराहे पर इश्क़ लड़ाने वालों का इलाहाबाद। . एमएनएनआईटी, ट्रिपलआईटी, आईईआरटी में पढ़ने वालों का इलाहाबाद। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव का इलाहाबाद। शिएट्स का इलाहाबाद। यूनाईटेड, शम्भूनाथ, ईसीसी, बीबीएस का वन नाईट फाइट वाला इलाहाबाद। जेके इंस्टिट्यूट ऑफ फ़िज़िकल साइंसेज़ का इलाहाबाद। बीएचएस, जोसेफ़, मैरी कॉन्वेंट में पढ़े हुए, बढ़े हुओं का इलाहाबाद। . हम सब इलाहाबाद के और हम सबका इलाहाबाद। बैंक रोड पर बैठे हम सभी दोस्तों की टोली का मासूम सा इलाहाबाद। कॉलेज कैंटीन में प्यार की पींगें बढ़ाते हुए आशिक़ों का इलाहाबाद। और कुछ सालों पहले यहाँ पर हम जो यहाँ आये थे और चंद दिनों में हम जो यहाँ से चले जाएँगे, हमारी उन खट्टी-मीठी-तीख़ी सी यादों का इलाहाबाद। . घर से दूर एक घर, इलाहाबाद। परिवार के बाहर एक परिवार, इलाहाबाद।
#poem
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"The illusion that everything will just turn out magically without having to communicate; thoughts, feelings and needs in a relationship is an immaturity that will make true connection impossible." .............. - Anonymous
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The below poem is based on reality vs fantasy. Hope you'll connect... .
ZID
Hathon ko hain zid, aasman choone ki.
Aur pairon ko, zameen se judna hain.

Palkon ko hain zid, khwaabon mein rehne ki.
Aur aankhon ko, sach dekhna hain.

Kaano ko hain zid, behtareen alfaazon  ki.
Aur zubaan ko, na phisalna hain.

Dil ki hain zid, tez bhagne ki.
Aur dhadkan ko, dheeme chalna hain.

Nandaniyaan ki hain zid, khayaloon mein basne ki.
Aur tazurba ko, haqeeqat ke saath safar karna hain.
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#poem  . "The illusion that everything will just turn out magically without having to communicate; thoughts, feelings and needs in a relationship is an immaturity that will make true connection impossible." .............. - Anonymous . The below poem is based on reality vs fantasy. Hope you'll connect... . ZID Hathon ko hain zid, aasman choone ki. Aur pairon ko, zameen se judna hain. Palkon ko hain zid, khwaabon mein rehne ki. Aur aankhon ko, sach dekhna hain. Kaano ko hain zid, behtareen alfaazon  ki. Aur zubaan ko, na phisalna hain. Dil ki hain zid, tez bhagne ki. Aur dhadkan ko, dheeme chalna hain. Nandaniyaan ki hain zid, khayaloon mein basne ki. Aur tazurba ko, haqeeqat ke saath safar karna hain. . . . . . .
*तुम नहीं आई*
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पूनम की यह रात भी आ गई,
रात के माथे पर
चाँद बिंदी-सा टँग गया,
वादे के मुताबिक़ आज मिलना था हमें।
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मगर, तुम नहीं आई।
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रात ने आसमान पर झूमर सजा दिए,
चाँद के आदेश पर
सितारों ने टिमटिमाहट बढ़ा दी,
एक तारा मेरी ख़ातिर टूट पड़ा,
मैंने तुम्हारा आना माँगा।
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मगर, तुम नहीं आई।
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संसार में बिखरे तमाम शब्दों में से
मैंने एक शब्द ‘प्रेम’ चुना था,
जीवन जीने के ख़्याल के लिए निहायत ज़रूरी शब्द।
जब भी ‘प्रेम’ लिखना होता है मुझे
मेरी वर्णमालाओं की अज्ञानता ज़ाहिर हो जाती है,
मैं तुम्हारा नाम लिख देता हूँ,
यह बताना था तुम्हें।
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मगर, तुम नहीं आई।
. ~ विक्रांत मिश्रा
*तुम नहीं आई* . पूनम की यह रात भी आ गई, रात के माथे पर चाँद बिंदी-सा टँग गया, वादे के मुताबिक़ आज मिलना था हमें। . मगर, तुम नहीं आई। . रात ने आसमान पर झूमर सजा दिए, चाँद के आदेश पर सितारों ने टिमटिमाहट बढ़ा दी, एक तारा मेरी ख़ातिर टूट पड़ा, मैंने तुम्हारा आना माँगा। . मगर, तुम नहीं आई। . संसार में बिखरे तमाम शब्दों में से मैंने एक शब्द ‘प्रेम’ चुना था, जीवन जीने के ख़्याल के लिए निहायत ज़रूरी शब्द। जब भी ‘प्रेम’ लिखना होता है मुझे मेरी वर्णमालाओं की अज्ञानता ज़ाहिर हो जाती है, मैं तुम्हारा नाम लिख देता हूँ, यह बताना था तुम्हें। . मगर, तुम नहीं आई। . ~ विक्रांत मिश्रा
In the latest open mic- mukammal 6.0, we saw some great performances. They made us laugh, cry and wonder about a lot of things. We recommend you to use headphones for an enhanced experience.
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In this performance, @saifsdq (Saif Siddiqui)  performs 2 beautiful Nazm, both short yet piercing and touching our hearts. Listen to him perform in his beautiful voice. 
Video edited by : @amishshah13
Videography by: @manasonthemoon
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Due to certain reasons we uploaded the video late but 
WE WOULD BE UPLOADING VIDEOS EVERY SATURDAY. STAY TUNED AND SUBSCRIBE TO US NOW.

#ahmedabad #spokenart #HINDIPOETRY #hindiliterature #openmic #ahmedabad #amdavadism #ahmedabad_instagram #poetry #nostalgic #poetryevents
In the latest open mic- mukammal 6.0, we saw some great performances. They made us laugh, cry and wonder about a lot of things. We recommend you to use headphones for an enhanced experience. . In this performance, @saifsdq (Saif Siddiqui) performs 2 beautiful Nazm, both short yet piercing and touching our hearts. Listen to him perform in his beautiful voice. Video edited by : @amishshah13 Videography by: @manasonthemoon . Due to certain reasons we uploaded the video late but WE WOULD BE UPLOADING VIDEOS EVERY SATURDAY. STAY TUNED AND SUBSCRIBE TO US NOW. #ahmedabad  #spokenart  #HINDIPOETRY  #hindiliterature  #openmic  #ahmedabad  #amdavadism  #ahmedabad_instagram  #poetry  #nostalgic  #poetryevents 
TMP दिवस मुबारक़ 
कहतें है कि अगर कुछ करने की ठान लो और मन सच्चा और इरादे नेक हो तो पूरी कायनात मदद में लग जाती है । आज से ठीक एक साल पहले The Modern Poets ने अपना पहला कार्यक्रम किया । एक छोटे से पेज के लिए ये बड़ा कदम था मन मे चिंता ,अशांति और घबराहट थी कि सब अच्छे से हो जाये । सुबह 9 बजे ही वेन्यू पर हमारी मण्डली के अंशुल हर्षित आदित्य आदर्श निक्की और मोहित पहुँच गए थे । सब के सब काफ़ी नर्वस थे कि कोई आयेगा या नहीं और फिर धीरे धीरे लोग आने शुरू हो गए और तकरीबन 40 से ज्यादा भी नए और मंझे हुए लेखक कवियों का "समागम" हुआ । The Modern Poets का पहला बड़ा कदम । और फिर ये काफ़िला रुका नहीं आज तकरीबन 10000 लोगों से भी बड़ा साहित्य परिवार बन के उभरा है ।एक साल पहले जो ख़्याल का बीज हमने बोया था जिसे आप सब ने प्यार और विश्वास के पानी से सींचा, आज वो एक पेड़ बन चुका है, एक हरा भरा पेड़ बन चुका है। पिछले एक साल में समागम 1.0 नाम के इवेंट से शुरुआत हुई और बहुत सी खुशियां और सुकून आपने हमारी झोली में डाली, इसीलिए सिर्फ शुक्रिया कह देना हमारे अंदर साँस ले रहें एहसासों को बयाँ नहीं कर पाएगा। ये सिर्फ कहने की बात नहीं है, ये हमारा मानना है कि आप सब लोग मोहब्बत है। आप सब से एक रिश्ता जुड़ चुका है। बहुत शुक्रिया आप सब का हमें सिखाते रहने के लिए, हमें सुनाते रहने के लिए, और हमारी सुनने के लिए भी। आज सब ना ही सिर्फ अच्छे लिखने वाले, पढ़ने वाले हैं, आप सब हमारे मुस्कुराते चेहरों की वजह है। हमें अपनाने के लिए और हम पर विश्वास बनाए रखने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया हमें मजबूत बनाने के लिए, हमारे साथ चलने के लिए, हमें एक मकसद और एक रास्ता दिखाने के लिए जिस पर निरंतर हम आगे बढ़ते चले जा रहे है और जो सोच लेकर आगे बढ़े थे शायद उसे मुक्कमल कर पाए । 
हँसते मुस्कुराते गुज़र रहा है ये सफ़र
आप सब के होने से 'घर' रहा है ये सफ़र

हम सब एक परिवार है बस यहीं वजह है
हर सम्त ,हर जगह उभर रहा है ये सफ़र

आपकी इनायतों में कुछ तो बात ज़रुर है
ऐसे ही नहीं नाम कर रहा है ये सफ़र

आप नहीं थे तो क्या था?, कुछ नहीं
आप सब है तो सुधर रहा है ये सफ़र

अब और क्या चाहें हम इसके आगे कि
दामन खुशियों से भर रहा है ये सफ़र

TMP दिवस मुबारक़ 
आप लोग प्यार  हैं । हम सब परिवार हैं ❤️
TMP दिवस मुबारक़ कहतें है कि अगर कुछ करने की ठान लो और मन सच्चा और इरादे नेक हो तो पूरी कायनात मदद में लग जाती है । आज से ठीक एक साल पहले The Modern Poets ने अपना पहला कार्यक्रम किया । एक छोटे से पेज के लिए ये बड़ा कदम था मन मे चिंता ,अशांति और घबराहट थी कि सब अच्छे से हो जाये । सुबह 9 बजे ही वेन्यू पर हमारी मण्डली के अंशुल हर्षित आदित्य आदर्श निक्की और मोहित पहुँच गए थे । सब के सब काफ़ी नर्वस थे कि कोई आयेगा या नहीं और फिर धीरे धीरे लोग आने शुरू हो गए और तकरीबन 40 से ज्यादा भी नए और मंझे हुए लेखक कवियों का "समागम" हुआ । The Modern Poets का पहला बड़ा कदम । और फिर ये काफ़िला रुका नहीं आज तकरीबन 10000 लोगों से भी बड़ा साहित्य परिवार बन के उभरा है ।एक साल पहले जो ख़्याल का बीज हमने बोया था जिसे आप सब ने प्यार और विश्वास के पानी से सींचा, आज वो एक पेड़ बन चुका है, एक हरा भरा पेड़ बन चुका है। पिछले एक साल में समागम 1.0 नाम के इवेंट से शुरुआत हुई और बहुत सी खुशियां और सुकून आपने हमारी झोली में डाली, इसीलिए सिर्फ शुक्रिया कह देना हमारे अंदर साँस ले रहें एहसासों को बयाँ नहीं कर पाएगा। ये सिर्फ कहने की बात नहीं है, ये हमारा मानना है कि आप सब लोग मोहब्बत है। आप सब से एक रिश्ता जुड़ चुका है। बहुत शुक्रिया आप सब का हमें सिखाते रहने के लिए, हमें सुनाते रहने के लिए, और हमारी सुनने के लिए भी। आज सब ना ही सिर्फ अच्छे लिखने वाले, पढ़ने वाले हैं, आप सब हमारे मुस्कुराते चेहरों की वजह है। हमें अपनाने के लिए और हम पर विश्वास बनाए रखने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया हमें मजबूत बनाने के लिए, हमारे साथ चलने के लिए, हमें एक मकसद और एक रास्ता दिखाने के लिए जिस पर निरंतर हम आगे बढ़ते चले जा रहे है और जो सोच लेकर आगे बढ़े थे शायद उसे मुक्कमल कर पाए । हँसते मुस्कुराते गुज़र रहा है ये सफ़र आप सब के होने से 'घर' रहा है ये सफ़र हम सब एक परिवार है बस यहीं वजह है हर सम्त ,हर जगह उभर रहा है ये सफ़र आपकी इनायतों में कुछ तो बात ज़रुर है ऐसे ही नहीं नाम कर रहा है ये सफ़र आप नहीं थे तो क्या था?, कुछ नहीं आप सब है तो सुधर रहा है ये सफ़र अब और क्या चाहें हम इसके आगे कि दामन खुशियों से भर रहा है ये सफ़र TMP दिवस मुबारक़ आप लोग प्यार हैं । हम सब परिवार हैं ❤️